Acidity: एसीडिटी के लक्षण, कारण, परिणाम, चिकित्सा

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परिचय

जब आमाशय में ‘अम्ल रस’/Acidity treatment hindi की अधिकता होने लगती है तब उसको अम्लपित्त के नाम से जाना जाता है। अम्लपित्त/Acid एक पित्तजन्य विकार है इसीलिये इसका अम्लपित्त नामकरण किया गया है। नमक, खट्टे पदार्थ तथा अत्यधिक तीक्ष्ण गर्म वस्तुयें प्रयोग करने से पित्त प्रकुपित हो उठता है और ‘अम्ल रस’/Acidity treatment hindi की अधिकता होने लगती है। इसे हाइपर एसीडिटी /हार्टवर्न/Acidity treatment hindi भी कहते हैं।

रोग के प्रमुख कारण

यह बीमारी आमाशय (पाक स्थली) में अम्ल/Acid की अधिकता के कारण होती है। सामान्य अवस्था में पाक स्थली के भीतर स्थित छोटी-छोटी ग्रन्थियों से निकलने वाला हाइड्रोक्लोरिक अम्ल/Acidity treatment hindi भोजन को पचाने में मदद करता है, किन्तु यही अम्ल/Acid जब आवश्यकता से अधिक मात्रा में बनने लगता है तो छाती की हड्डी के पीछे भोजन नली में जलन की अनुभूति होती है। एसिड प्रायः निम्न कारणों से अधिक बनती है

1. मानसिक चिन्ता एवं हर काम में जल्दबाजी।

2. खाने में अधिक मिर्च, अचार व गर्म मसाले।

3. तला व अधिक मसालेदार भोजन पेट भर खाने के बाद रात को बिना टहले सो जाना।

4. भोजन समय पर न लेना।

5. अधिक शराब के सेवन एवं धूम्रपान।

6. ज्यादा तम्बाकू व चूने, कत्थे का पान खाना।

7. क्रानिक (Chronic) इसोफेजाइटिस एवं हाइटस हर्निया।

रोग के प्रमुख लक्षण

छाती के बीचों-बीच जलन होती है। अर्थात् सीना जलने लगता है। आँखों में जलन होती है, माथे पर तपन मालूम होती है। हथेलियों और पैरों के तलवों में भी जलन होती है। पेशाब लाल, पीले रंग का होता है, मल त्याग के समय मल गर्म लगता है। इस प्रकार पित्त पूरे शरीर में दाह और जलन पैदा करता है। अम्ल/Acid पित्त की प्रारम्भिक स्थिति में जलन के लक्षण कम दिखायी देते हैं। जब रोग बढ़ जाता है तब जलन के लक्षण अधिक दिखाई देने लगते हैं। रोगी को ऐसा निरन्तर अनुभव होता रहता है जैसे उसके शरीर में सूक्ष्म ज्वर हो किन्न ज्वर की दवा लेने से यह लक्षण दर नहीं होता। यही नहीं थर्मामीटर से भी इस ज्वर का पता नहीं लगता है।

इस रोग में भूख कम हो जाती है। अशक्ति, थकान, पैरों में पीड़ा, चक्कर आना, आँखों के सामने अँधेरा छा जाना आदि तकलीफें होने लगती हैं। रोगी का मल ढीली स्थिति में रहता है। कुछ लोग कब्जियत की भी शिकायत करते हैं। अम्ल/Acid की अधिक मात्रा बढ़ जाने पर रोगी के शरीर पर छोटी-छोटी फंसियाँ हो जाती हैं। उसे हल्की-सी खजलाहट भी होती है। रोगी के जोड़ों में पीडा होती है, बेचैनी बनी रहती है, खाने की इच्छा नहीं होती है। मुँह का स्वाद बिगड़ा रहता है। नींद में कमी आ जाती है। रोगी को कई बार रक्तस्राव भी होते देखा जाता है। यदि अम्लपित्त का प्रभाव लम्बे समय तक जारी रहे, तो रोगी को गर्मी का प्रभाव स्पष्ट मालूम होने लगता है। इससे बाल झड़ने या सफेद होने लगते हैं। रोगी का स्वभाव चिड़चिड़ा और क्रोधी हो जाता है।

रोग की पहचान

छाती के बीचों-बीच में जलन, इपीगैस्ट्रिक स्थान पर जलन व दर्द रोगी अँगुली का इशारा कर बताता है। खट्टी डकारें, मुँह में खट्टा/Acid व कड़वा जल भर आना, गर्म पेय या तला हुआ भोजन लेते ही जलन का होना आदि लक्षणों के देने पर रोग को पहचानने | में कोई कठिनाई नहीं होती है।

रोग का परिणाम

इस व्याधि के उपद्रव स्वरूप कभी-कभी त्वचा के रोग उत्पन्न हो सकते हैं। सावधानी न बरतने पर आगे चलकर पेट में अल्सर । हो जाने की सम्भावना बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में आमाशय में तीव्र पीड़ा होती रहती है। रोग के अधिक जीर्ण होने पर दस्त के साथ आँव और पित्त निकलने की शिकायतें | आम होने लगती हैं।

चिकित्सा विधि

भोजन की ओर विशेष ध्यान दें। खट्टे-चटपटे, मिर्च-मसालेदार तेल, घी, चिकनाईयुक्त खाद्य पदार्थ तत्काल बंद करा दें। चाय, कॉफी, शराब (मद्य), माँस, तम्बाकू, आधुनिक मसालेदार पुड़िया आदि का पूर्ण निषेध ।आँवला और अनार को छोड़कर कोई खट्टा फल खाने को न दें। नये रोग में प्रोटीनयुक्त भोजन दिया जा सकता है।

पथ्य एवं सहायक चिकित्सा

एसीडिटी में मैदायुक्त भोजन, आलू, गरिष्ठ भोजन, अधिक मात्रा में शक्कर, मिठाई, मिर्च और खट्टी चीजें न दें। आलू का सेवन उपयुक्त नहीं है। सुबह अण्डा, दोपहर को हल्का भोजन, दूध, तीसरे पहर मक्खन लगे टोस्ट और शाम को हल्का आहार दें। खाने से पहले Hydrochloric acid dil. और खाने के बाद सोडा बाई कार्ब की गोली दें।

नोट-सोडा बाई कार्ब को शहद में मिलाकर 4-4 घण्टे बाद चटाने से भी लाभ होता है। मैग कार्ड भी दिया जा सकता है।

एसीडिटी/Acidity में सेवन कराने योग्य अपटूडेट आयुर्वेदिक पेटेन्ट टेबलेट्स

पेटेन्ट टेबलेट्स, मात्रा तथा सेवन कराने की विधि

1. एसीडिनोल (Acidinol) ‘बान’

वयस्क-2 टिकिया दिन में 3 बार जल से। बालक-1 टिकिया दिन में 3 बार।

2. एसीडॉक्स (Acidox) भुवनेश्वरी’

2 गोली दिन में 3 बार।

3. अम्ल/Acid पित्तान्तक योग. वैद्यनाथ’

4 टिकिया दिन में 2 बार।

4. रेलारसिड (Relarcid) Akshay’

2 टिकिया दिन में 3 बार।

5. अल्सीपेट (Ulcipat) ‘Pat’

1-1 टिकिया दिन में 4 बार।

6. मेनोल (Manoll) ‘चरक’

2-2 टिकिया दिन में 2-3 बार जल, दूध या चाय के साथ दें। बच्चों को 1/2-1 टिकिया 2-3 बार नित्य दें।

7. सुक्तिन (Sooktyn) ‘एलार्सिन’

2-2 टिकिया दिन में 2 बार मुख्य भोजन के मध्य अथवा बाद में। बच्चों को 1/2-1 टिकिया दिन में 3 बार।

8. अभयासन (Abhayassan) ‘झण्डू’

4-8 टिकिया दिन में 2 बार गर्म जल से।

9. गैसेक्स (Gasex) ‘हिमालय’

2-3 टिकिया भोजन के बाद।

10. गैसक्योर (Gascure) ‘जनता’

2-2 टिकिया दिन में 3-4 बार ।

एसीडिटी/Acidity में सेवन कराने योग्य अपटूडेट आयुर्वेदिक पेटेन्ट कैप्सूल्स

पेटेन्ट कैप्सूल्स, मात्रा तथा सेवन कराने की विधि

1. हर्बोसिड (Herbocid) ‘मधुर’

1-2 कैप्सूल्स दिन में 3 बार भोजनोपरान्त ।

2. अल्सारिना (Ulsarina) ‘प्रभाव’

1-2 कै० दिन में 2 बार।

3. अल्सेंट (Ulsant) ‘Sawai’

2-3 कै० दिन में 3 बार। इसका सीरप भी आता है।

4. लिवोफिट (Livofit) ‘इण्डो-जर्मन’

1-2 कै० भोजनोपरान्त दिन में 3 बार।

5. विमलिव (Vimliv) ‘धूतपापेश्वर’ 1-2 कै० सुबह-शाम गर्म जल से। बच्चों को आयु के अनुसार।

6. चामलिव (Chamliv) ‘एम्पल’

1-2 कै० सुबह-शाम गर्म जल से। बच्चों को आयु के अनुसार।

7. गैसगो (Gasgo) ‘इण्डो -जर्मन’

1-1 कै० दिन में 2 या 3 बार। 1-2 कै० खाना खाने के बाद गरम जल से।

एसीडिटी/Acidity में सेवन कराने योग्य अपटूडेट आयुर्वेदिक पेटेन्ट सीरप/पेय/तरल

पेटेन्ट सीरप/पेय/तरल, मात्रा तथा सेवन कराने की विधि

1. याकरिन (Yakrin) मैक्सो’

2-2 चम्मच दिन में 3 बार तथा बच्चों को आयु के अनुसार।

2. लामाजाइम (Lamazyme) लामा’

2-3 चम्मच दिन में 2-3 बार भोजनोपरान्त।

3.वोमीटेब (Vomitab) ‘चरक’

1-1 चम्मच दिन में 3 बार।

4. गैस्टोजाइम (Gastozyme) ‘एसेप्टिक’

2-3 चम्मच दिन में 3 बार भोजनोपरान्त बच्चों को आयु के अनुसार दें।

5. मेनासिड (Manacid) ‘मेनब्रो

1-2 चम्मच भोजन से पूर्व 4-8 सप्ताह तक |

6. अल्सांट सीरप (Ulsant Syrup) ‘Sawai’

1/2-1 चम्मच दिन में 3 बार।

7. डाइमैक्स (Dimex) ‘प्रताप फार्मा’

1-2 चम्मच दिन में 3 बार। बालक-12 से – 1 चम्मच दिन में 3 बार।

8. सनडैस्टो सीरप ‘संजीवन रिसर्च लेबो०’

-2 चम्मच रोगानुसार । बालक-20 से 30 बूंद शीतल जल के साथ।

9. डिजी-अप (Dige-up) ‘किरन फार्मेसी’

1-2 चम्मच बराबर जल के साथ। बालक1/2-1 चम्मच।

10. बीकोजिन (Bekozin) ‘विकास फार्मा’

1-2 चम्मच दिन में 2 बार गर्म जल से।

11. एसिडोसिड (Acidocid) ‘यमुना फार्मेसी’

2-2 चम्मच दिन में 3 बार।

12. कार्मीजाल (Carmizal) ‘शिवा फार्मा’

2-2 चम्मच जल के साथ भोजन से पूर्व या बाद।

13. जायनिल (Zynil) ‘एसिस लेबो०’

2-2 चम्मच दिन में 3 बार, भोजनोपरान्त दें।

14. इफसिड (EFCID) ‘डाबर’

2-2 चम्मच दिन में 3 बार।

एसीडिटी/Acidity के लक्षणों के अनुसार विशेष चिकित्सा

1. भूख की कमी, पेट में गैस, एसीडिटी/Acidity treatment hindi

इफसिड (डाबर) 1 टिकिया, लिवोफिट (इण्डोजर्मन)1 कै०, मेनोल 2 टिकिया (चरक फा० की), इन सबको मिलाकर ऐसी 1-1 मात्रा में दिन में 3 बार दें।

2. अम्ल/Acidपित्त तथा खट्टी डकारें

जायनिल (एसिस लेबो०) 2 चम्मच + कार्मीजाल (भिवा फार्मा) 2 चम्मच, इन दोनों को मिलाकर दिन में 3 बार दें।

3. एसीडिटी/Acidity से उत्पन्न खाने से पूर्व या बाद में दर्द

फिलिप्स मिल्क ऑफ मैगनेशिया 1 से 4 छोटे चम्मच दिन में 3-4 बार दें।

4 साधारण रोग में

विमलिव (धूतपापेश्वर) 1 कै०, गैसेक्स (हिमालया) 2 टिकिया, मिलाकर दिन में 2 बार दें।

आधुनिक उपचार

रोगी को शुरू से ही एन्टासिड (Antacids) दें। प्रत्येक 4 से 6 घण्टे में 3 चम्मच एन्टासिड लें। जैसे-

1. म्यूकेन जैल (Mucaine gel)|

2. डाइजिन जैल (Digine gel) या डाइजिन टेबलेट।

3. पोलीक्रोल फोर्ट जैल (Polycrol forte gel)।

इसको लेने से जलन व दर्द में आराम मिलता है। उल्टी की शिकायत होने पर इन्जेक्शन द्वारा मेटोक्लोप्रामाइड दें। इन्जेक्शन पेरीनॉर्म (Perinorm) एम्पुल माँसपेशागता या आई० वी० अथवा मेटोक्लोप्रामाइड की गोली दें।

  • यदि रोगी को हाथ में इन्फैक्शन हो तो एण्टीबायोटिक औषधियाँ भी देनी चाहिये।
  • करोसिव पायजनिंग के लिये शुरू में ही एण्टीडोट दें। रोगी को प्रत्येक अवस्था में इन्जेक्शन के द्वारा H, रिसेप्टर (Antagonist) दे सकते हैं। जैसे-इन्जे० एसिलोक (Aciloc)2 ml. माँसपेशीगत या आई० वी० या इन्जेक्शन रेनटेक (Rantac) 2 ml. माँसपेशीगत या आई० वी०|
  • यदि ज्यादा खाना खाने से या चिकनाईयुक्त भोजन से रोग हो तो ईनो (Eno) या पेपेज (Pepz) ले सकता है। इससे तुरन्त आराम मिलता है।