Amoebic: अमीबियासिस के लक्षण, कारण, परिणाम, चिकित्सा

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डिसेन्ट्री/प्रवाहिका के भेद

यह रोग दो प्रकार का होता है

1. अमीबिक ( अमीबियासिस ) प्रवाहिका (Amoebic dysentery) (Amoebiasis treatment hindi)

2. बेसिलरी प्रवाहिका (Bacillary dysentery)

अमीबियासिस (Amoebiasis)

अमीबियासिस परिचय/Introduction of Amoebiasis treatment hindi

अमीबियासिस/Amoebiasis treatment hindi को खूनी पेचिश भी कहते हैं जो बड़ी आंत्र (colon) में ऐंटामीबा हिस्टोलिटिका नामक जीवाणु के संक्रमण से होता है। इसमें प्रतिदिन 3-4 दस्त आते हैं। साथ ही बड़ी मात्रा में आये पतले दस्त के साथ काला-लाल (Dark-Red) रक्त सामान्यतः पाया जाता है। इस रोग की मुख्य विशेषता यह है कि इसमें रोगी को बार-बार मल (Stool) के साथ ऑव आती है और इसके साथ-साथ उसे मरोड़ भी होती है।

अमीबियासिस विशिष्ट लक्षण/Amoebiasis treatment hindi causes

1. सर्वप्रथम अतिसार उत्पन्न होता है जो कई दिनों तक चलता है।

2. उदरमूल और मल के साथ प्रवाहरण होता है।

3. प्रायः तापक्रम सामान्य रहता है।

4. तीव्र अवस्था में रोगी 2-4 घण्टे में लगभग 12 बार या इससे भी अधिक प्रवाहरण के साथ मल त्याग के लिये जाता है।

5. मल की मात्रा में कम पर श्लेषमा (Mucous) अधिक होता है तथा थोड़ी मात्रा में रक्त भी पाया जाता है।

6. दस्त अधिक दुर्गन्धित होता है। कभी-कभी रक्त व.ऑव अनुपस्थित रहती है।

7. रोगी को काफी दिनों से पतले मल में अथवा खून (या दोनों) की शिकायत होती है, किन्तु बीच में रोगी का मल सामान्य हो सकता है अथवा कब्ज की शिकायत हो सकती है।।

8. इसके अतिरिक्त-पेट में ऐंठन युक्त दर्द, मल त्याग के बाद भी मलाशय में मल का उपस्थिति का एहसास, हल्का बुखार, भूख न लगना आदि लक्षण दृष्टिगोचर होते हैं।

9. इस रोग में जीर्ण अवस्था की स्थिति में रक्ताल्पता तथा निर्बलता विशेष रूप होती है।

अमीबियासिस चिकित्सा विधि/Amoebiasis treatment hindi Therapy Method

प्रवाहिका होने पर दस्त बन्द करने की औषधि कभी भी नहीं देनी चाहिये। इससे दस्त बन्द होकर पेट में अफारा पैदा हो जाता है और तीव्र पीड़ा होती है। रोगी को ऐसी औषधि देनी चाहिये जिससे ऑव भी बन्द हो जाये और बनी हुई ऑव बाहर निकल जाये। 4-5 ग्राम ईसबगोल की भूसी गुनगुने जल से दें, इससे ऑव निकल जाती है। इस प्रकार रोग हर उपचार (Curative treatment) में उपयुक्त आहार, पूर्ण विश्राम, तरल की अल्पता आदि हो तो उसे दूर करना चाहिये तथा शरीर में उपस्थित विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालना आवश्यक है। रोग निरोधी उपचार के खान-पान की स्वच्छता अत्यन्त आवश्यक है।

पथ्य एवं सहायक उपचार/Amoebiasis treatment hindi

प्रवाहिका होने पर छाछ और मरोड़ में दही बहुत लाभदायक होता है। पेचिस के रोगी को आहार के रूप में ताजा फीका दही लेना चाहिये। दही से पेट ठीक रहेगा, मरोड़ कम होगी और मल त्याग की प्रवृत्ति कम होगी। यदि केवल दही से भूख न मिटे तो मूंग की दाल की पतली खिचड़ी के साथ दही का सेवन करें। इस प्रकार पेचिश में दही को आहार के रूप में प्रमुख कारण देना चाहिये। यदि रोगी को दही अनुकूल न पड़े तो मट्ठा, छाछ का उपयोग किया जा सकता है। रोगी को हल्का सुपाच्य भोजन लेना चाहिये। पतली खिचड़ी खायें, साथ में दही का सेवन अवश्य करें। किन्तु दही अथवा दही की लस्सी में पोदीना, भुना हुआ जीरा और नमक मिला कर लें। मीठी लस्सी उपयुक्त नहीं है।

सावधान- पेचिश की स्थिति में रोगी को वसायुक्त, उष्ण तेल, मिर्च और मसालेदार भोजन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिये।

अमीबाजन्य आँत/अमीबियासिस में उपयोगी आयुर्वेदिक पेटेन्ट टेबलेट/Ayurvedic Patent Tablets in Amoebiasis treatment hindi

1. डायारेक्स (Diarex) हिमालय ड्रग्स कं.’

साधारण रोग में 1-1 गोली दिन में 3 बार एवं रोग की तीव्रावस्था में 2-2 गोली दिन में 3 बार । बच्चों को 1/2 गोली दिन में 3 बार दें।

2. दीपन टेबलेट (Deepan Tab.) ‘चरक फार्मास्युटिकल्स’

2-2 गोली दिन में 3 बार, बच्चों को 1-1 गोली दिन में 3 बार एवं शिशुओं को 1/2 गोली दिन में 3 बार दें।

3. एण्टाजाइम (Antazyme) जी फार्मा’

2-2 गोली दिन में 3 बार भोजन के बाद दें। बच्चों के लिये 1-1 गोली सुबह शाम भोजन के बाद दें।

4. अमीबिका टेब. (Amibica Tab.) ‘श्री वैद्यनाथ आ. भ.’

1-2 गोली दिन में 3 बार जल के साथ दें।

5. एडीसिन (Adysin) ‘हर्वोमेड’

2-2 गोली दिन में 2 या 3 बार भोजन के बाद। बच्चों को 1-1 गोली दिन में 2 बार या 3 बार दें।

6. इण्ट्रोडारिन (Enterodarin) ‘वान’

1-2 गोली दिन में 3 बार । बच्चों को 1-1 गोली दिन में 3 बार। इसका तरल भी आता है।

7. एमेडियो (Amydio) एमिल फार्मास्यु.’

1-2 गोली दिन में 3 बार। इसका सीरप भी आता है। यह अमीबिक डिसेन्ट्री, कोलाइटिस, क्रानिक अल्सरेटिव कोलाइटिस आदि में उपयोगी है।

8. एमेनट्रोल (Amentrol) यूनीवर्सल’

2-2 टिकिया दिन में 2-3 बार दें। हमा कैप्सूल भी आता है।

9. डायारिनोल (Diarrhinol) एसो’

1-2 टिकिया दिन में 3 बार। बच्चों को ।। टिकिया दिन में 3 बार दें।

अमीबियासिस में उपयोगी आयु० पेटेन्ट कैप्सूल्स/Ayurvedic Patent Capsules in Amoebiasis treatment hindi

1. लिवोफिट (Livofit) इण्डो-जर्मन फार्मास्युटिकल्स’

1-2 कैप्सूल दिन में 2 बार भोजन के बाद।

2. डायरोसीन-500 (Diarosin-500) ‘सिन्थोकेम’

1-2 कैप्सूल दिन में 3-4 बार। यह पेचिश मरोड़, ऐंठन में विशेष लाभकारी है।

3. बैक्टेफर (Bactefer)’अश्वनी फार्मास्युटिकल्स’

2-3 कैप्सूल प्रतिदिन दें।

4. त्रिवेर कैप्सूल (TriverCap.)’अनुजा फार्मास्युटिकल्स

2-2 कैप्सूल दिन में 2-3 बार दें। बच्चों को 1-1 कैप्सूल दिन में 2-3 बार दें।

* यह अमीबाजन्य संक्रमित होने वाली अमीबिक डिसेन्ट्री, वैसिलरी डिसेन्ट्री में उपयोगी है।

5. एमीबैक्स (Amibex) ‘एच. बी. फार्मा’

1-1 कैप्सूल दिन में 3 बार ।

अमीबियासिस में उपयोगी आयु० पेटेन्ट सीरप/तरल/Ayurvedic Patent Syrup in Amoebiasis treatment hindi

1. केडायरिया (Kydarya) आरोग्य’

1-2 चम्मच दिन में 3 बार अथवा आवश्यकतानुसार दें।

2. डायाडिन सीरप (Diadyn Syp.) ‘चरक’

3-6 चम्मच दिन में 3 बार । बच्चों + 2-3 चम्मच दिन में 3 बार ।

3. एमेडियो सीरप (Amydio Syp.) ‘एमिल’

2-3 चम्मच दिन में 3 बार । बालक 1-2 चम्मच दिन में 3 बार।

4. डायार्हिन (Diarrhin Syp.) अजमेरा’

1-2 चम्मच दिन में 3 बार अथवा रोग की अवस्थानुसार दें।

अमीबियासिस में उपयोगी आ० पेटेन्ट पाउडर/ग्रेन्यूल्स/Ayurvedic Patent Grannules in Amebiasis treatment hindi

1. आइसोबेल (Isobel) लामा

5-10 ग्राम तक पानी के साथ दिन में 2 या 3 बार दें।

बेसिलरी प्रवाहिका (Bacillary Dysentery)

परिचय

यह प्रवाहिका न होकर एक प्रकार अतिसार ही है, जो बहुत घातक होता है। इसमें रोग का कारण अण्डाणु होते हैं। इसमें तीव्र ज्वर आता है। इसे ज्वरातिसार कहना अधिक उपयुक्त है। इसमें 10, 20, 30, 50 बार तक पतले दस्त होते हैं। पेट में ऐंठन के साथ। दर्द होता है। दस्त में म्यूकस और रक्त दोनों होते हैं। इस प्रकार के मरोड़ के साथ 102°F तक ज्वर रहता है। अधिक मात्रा में मल त्याग होने से रोगी अधिक कमजोर हो जाता है।

प्रमुख कारण

बड़ी आँत में मल तथा श्लेष्मा के संचय होने पर 3 प्रकार के दण्डाणु स्थान संश्रय करके पेचिश उत्पन्न करते हैं। ये अग्र हैं

1. शीगा वेसिलस

2. सोने वेसिलस

3. शीगा फ्लेक्शनरी

प्रमुख लक्षण

रोगी प्रायः युवा व्यक्ति होता है जो रोग का प्रारम्भिक अवस्था में उदर शूल तथा आतता से पीड़ित होता है। ज्वर 102 डि.फा. तक ही सकता है। मल प्रवाहरण के साथ-साथ बार-बार जाने लगता है पर प्रत्येक बार मल थोड़ा होता है। मल के साथ श्लेषमा और रक्त भी कुछ मात्रा में निकलते हैं। मूत्र की मात्रा कम होती है। स्पर्श करने पर उदर में स्पर्शी सध्यता मिलती है।

चिकित्सा विधि

रोग से बचाव हेतु खानपान की स्वच्छता अत्यन्त आवश्यक है। रोग उपचार में पूर्ण विश्राम, तरल की अल्पता आदि हो तो उसे दूर करना, साथ ही शरीर में उपस्थित विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालना आवश्यक होता है। प्रवाहिका में अण्डी का तेल/कैस्टर ऑयल बहुत लाभकारी है। रात को सोते समय 1 चम्मच कैस्टर ऑयल गर्म पानी या गर्म दूध के काढ़े के साथ लें। अनुकूल पड़ने पर सुबह और दोपहर को भी लिया जा सकता है।

सामान्य उपचार

विषाक्त पदार्थों के निष्कासन हेतु एरण्ड स्नेह 240 बूंद दें। ईशबगोल 6-10 ग्राम को भी दिया जा सकता है। शरीर में हुई तरल की कमी को दूर करने के लिये साधारण लवण जल (Normal Saline) और ग्लूकोज 5% को 1-1 पिंट तक I/V दिया जा सकता है। यदि निपात की स्थिति नजर आये तो इसी द्रव के साथ एड्रीनलीन 0.5 मिलीलीटर (1/1000 घोल) को दे सकते हैं।

आमातिसार/वेसिलरी पेचिश में उपयोगी आयु० पेटेन्ट टेबलेट्स

1. डायारेक्स (Diarex) ‘हिमालय ड्रग्स कं.’

1-2 गोली दिन में 3 बार । तीव्रावस्था में 2-3 गोली दिन में 3 बार। बच्चों को आयु के अनुसार दें।

2. इंटेरोडीन (Enterodin) ‘भारतीय औषधि रसायनशाला’

1-2 गोली दिन में 3-4 बार। बच्चों को 1 गोलीदिन में 3-4 बार।

3. ग्रहणी कपाट वटी ‘बैद्यनाथ’

2-2 गोली दिन में 3 या 4 बार दें।

4. डायोरेन (Dioren) ‘हिमालय’

1-2 गोली दिन में 3 बार।

5. डिसेन्ट्रोल (Disentrol)’धन्वन्तरि आयुर्वेदिक फार्मेसी

1-2 गोली दिन में 3 बार जल से।

6. एडीसीन (Adysin) ‘हर्वोमेड’

2-2 गोली दिन में 2-3 बार खाना खाने के बाद । बच्चों को 1-1 गोली दिन में 2 बार।

7. ड्लासूर (Dlasure) ‘पर्ल’

1-2 टिकिया दिन में 3 बार।

8. एमेन्ट्रोल (Amentrol) यूनीवर्सल’

2-2 टिकिया दिन में 3 बार।

9. डायारिनोल (Diarrinol) एसेट’

1-2 टिकिया दिन में 3 बार। बच्चों को 1-1 टिकिया दिन में 3 बार ।

वेसिलरी पेचिश में प्रयुक्त आयु० पेटेन्ट तरल/पेय

1. डायारिल (Diaryl) ‘आर्या’

1-2 चम्मच दिन में 3 बार।

2. एमोएब्रड (Amoebrid) न्यू उदया।

3-3 चम्मच दिन में 3 बार भोजन से 1/2 घण्टे पूर्व । बच्चों को 1-1 चम्मच दिन में 3 बार।

नोट-यह बैक्टीरियल एवं अमीबिक डिसेन्ट्री, डायरिया, पतले दस्त, पेचिश, म्यूकस (श्लेष्मा का त्याग), अल्सर पीड़ा, आँतों की ऐंठन आदि अवस्थाओं में लाभकारी है। .

3. लीवरडेक्स (Liverdex) एसेप्टिक’

1-2 चम्मच दिन में 3 बार।

4. ड्लासूर (Dlassure) पर्ल’

1-1 चम्मच दिन में 3 बार । बच्चों एवं शिशओं को 1-2 मिलीलीटर दिन में 3 बार दें।

 डिसेन्ट्री की आधुनिक चिकित्सा

1. अमीबा डिसेन्ट्री (Amoebiasis)-तीव्र अमीबी पेचिश के लिये सबसे उत्तम दवा | मेट्रोनिडाजोल (400 mg दिन में 3 बार 7 दिन तक)। ‘टिनिडाजोल’ (300 mg दिन में 3 बार 7 दिन तक) भी उतनी ही लाभदायक है। पर इसके साइड इफैक्ट्स (जैसे-मितली आना, उल्टी होना; भूख कम हो जाना आदि) कुछ कम होते हैं। ‘मेट्रोनिडाजोल’ अथवा ‘टिनिडाजोल के एक कोर्स के बाद डायलोक्सॉनाइड फ्यूरोएट (Diloxamide furoate) का एक कोर्स (500) मिग्रा. दिन में 3 बार 10 दिन तक) दिया जाना चाहिये। टिनिडाजोल या मेट्रोनिडाजोल के बदले | सेकनिडाजोल (Secnidazole) की मात्र 2 गोलियाँ एक साथ देने से काम चल जाता है। अति तीव्र केसों में डिहाइड्रोइमेटिन (Dihydroemetine) का एक कोर्स (1 mg/kg) रोज रात को सोते समय 7 दिन तक माँसपेशीगत इन्जेक्शन द्वारा दिया जाना चाहिये। साथ में विटामिन |बी, का इन्जेक्शन 100 मिग्रा.भी दिया जाना चाहिये। इसके अतिरिक्त दस्त निरोधक दवायें | जैसे-क्योलिन, पेक्टिन देनी पड़ सकती है। निर्जलीकरण एवं इलैक्ट्रोलाइट असन्तुलन का| समुचित उपचार होना चाहिये।

*डिहाइड्रोइमेटीन के कोर्स के दौरान रोगी को पूर्ण विश्राम दिया जाना चाहिये तथा B. P.को प्रतिदिन इन्जेक्शन देने के पहले मापा जाना चाहिये। अकुंचनी रक्तदाब 100 mm (पारा) से कम होने पर इन्जेक्शन नहीं दिया जाना चाहिये। हृदय रोग से पीड़ित रोगी को यह इन्जेक्शन नहीं देना चाहिये।

दीर्घ कालिक अमीबी पेचिश (Chronic Amoebic dysentery) के लिये सबसे उत्तम दवा मेट्रोनिडाजोल या टिनिडाजोल ही है। इसके कोर्स के बाद ‘हायलोक्सॉनाइड-फ्यूरोएट’ का एक कोर्स दिया जाना चाहिये। प्रतिरोधी रोगियों में पारोमोमाइसिन (Paromomycin) 500 मिग्रा.. दिन में 3 बार 10 दिनों तक दिया जाना चाहिये।

इन दवाओं से लाभ न होने और यकृत के साइज में कोई परिवर्तन न हो पाने की स्थिति में यकृत से चूषण प्रक्रिया द्वारा पस (Pus) निकालने की आवश्यकता पड़ सकती है।

2. ऑव के साथ खून आना (पेचिश) (Bacillary Dysentery)-रोगी को पूर्ण विश्राम करायें। मुँह द्वारा तरल दें। पानी की कमी को दूर करने के लिये इलैक्ट्राल पाउडर का घोल भी दिया जा सकता है। उल्टी होने पर ग्लूकोज सैलाइन व रीगर सोल्यूशन दें। आई. वी. डिप द्वारा रोगी को मल्टीविटामिन इन्जेक्शन ग्लूकोज में मिला कर दें। उल्टी के इन्जेक्शन पेरीनार्म अथवा स्टेमेटिल 2 मिली माँसपेशी में दिया जा सकता है। पेट में दर्द व सूजन के लिये इन्जेक्शन Voveran 3 ml माँसपेशी में लगायें। साथ में टेबलेट जिनटेक (Zintac) 150 मिग्रा. सुबह-शाम दें या इन्जेक्शन रेनटेक 2 मिली. I. M. या I.V.दें। प्रारम्भ में रोगी को ‘कोट्राईमोक्साजोल’ की गोली देते हैं (5-7 दिन तक)। साथ में एम्पीसिलीन 500 mg हर 6 घण्टे में (5-7 दिन तक)। ज्यादा गम्भीर स्थिति में क्लोरम्फेनिकाल’ 500 mg सुबह-शाम 5 दिनों तक अथवा इन्जेक्शन जेण्टा 80 mg सुबह-शाम। नई दवाओं में ‘नेलीडिक्सिक एसिड (ग्रामोनेग-एम), सिप्रोफ्लोक्सासिन, नॉर-फ्लोक्सासिन, अमीकासिन उत्तम दवायें हैं। आजकल | बाजारों में बहुत-सी मिश्रित औषधियाँ (टेब. ग्रामोजिल, टेब. व सस्पेंशन वेसिजिल उपलब्ध हैं।