DILATATION OF STOMACH

DILATATION OF STOMACH परिचय

इस रोग में आमाशय सामान्य से बड़ा हो जाता है। इसीलिये इसे ‘आमाशयिक प्रसार‘/DILATATION OF STOMACH treatment hindi आमाशय का फैल जाना ‘डायलेटेशन ऑफ स्टमक’ कहते हैं।

DILATATION OF STOMACH के कारण

अब तक वैज्ञानिक इस रोग का असली कारण मालूम नहीं कर पाये हैं। वैसे आमतौर पर 1. जो लोग बिना भूख के भोजन पदार्थ एवं अन्य खाद्य-पेय पेट में ठूसते चले जाते हैं, उनमें यह रोग अधिक होता है।

2. यह रोग उनको भी अधिक होता है जो लोग भूख लगने पर बराबर खाते चले जाते हैं और इसके बाद पुनः दोबारा बिना सोचे-समझे खाने लगते हैं।

*प्रायः अधिक खाने-पीने के कारण आमाशय के नीचे का मुँह बन्द हो जाता है और इस प्रकार पेट बढ़कर आमाशयिक प्रसार /DILATATION OF STOMACH treatment hindi हो जाता है।

DILATATION OF STOMACH के लक्षण

1. बहुत ज्यादा खाना खाते ही जाना और पेट नहीं भरना।

2. पेट में एक तरह की अशान्ति की उपस्थिति अक्सर कर।

3. अफारा, वमन, पेट का फूला-सा रहना, अनमना-सा रहना, कुछ भी अच्छा न लगना आदि लक्षण होते हैं।

4. अत्यधिक खाते रहने पर भी पेट का न भरना।

5. दोपहर का खाया-पिया शाम को वमन से बाहर निकल जाता है।

6. रोगी दिन प्रतिदिन कृशकाय, कमजोर और दुर्बल होता चला जाता है।

7. आमाशय में पत्थर-सा रखा अनुभव होता

नोट- * अधिक खाना खाने वाले लोगों को तो यह रोग होता ही है। साथ ही अभिव शराब पीने वाले शराबियों, आराम तलब इन्सानों तथा अत्यधिक स्त्री सम्भोग करने वाले व्यक्तिों में यह रोग अधिक होता है।

* कारणों के आधार पर देखा जाये तो अनुभव किया जा सकता है कि अधिकांश वही रोगी इस रोग से ग्रसित होते हैं जो अपने खान-पान पर नियंत्रण नहीं रख पाते।

ऐसा भी देखने में आया है

* रोगी को आमाशय में सुई गड़ने जैसी तीखी वेदना होती है। रोगी के आमाशय को छूते ही पीड़ा होती है और वह कराहने लगता है।

* बार-बार खट्टी तथा सड़े अण्डे जैसी डकार आती है।

* रोगी के मुँह से लार बहती है, वह बार-बार थूकता रहता है।

* रोगी हमेशा मीठा खाते रहने की इच्छा करता है।

* आमाशय कमजोर होकर लटकने-सा लगता है।

* अन्त में सांस लेने में कठिनाई होने लगती है, तब रोगी घबड़ाने लगता है।

DILATATION OF STOMACH की पहचान

उपरोक्त लक्षणों के आधार पर रोग पहचानने में कोई कठिनाई नहीं होती है। कुछ ऐसे भी रोगी के वमन को कुछ देर तक रख दें तो उसमें 3 स्तर दिखाई देंगे

* प्रथम स्तर में भूरे रंग का स्तर साथ में फेन।

* द्वितीय स्तर में प्रथम स्तर के नीचे कींच के रंग का स्तर होगा।

* तृतीय स्तर में सबसे नीचे खाद्य का अंश।

DILATATION OF STOMACH का परिणाम

1. रोग के अधिक पुराना होने पर रोगी को बार-बार मूर्छा के दौरे पड़ने लगते हैं जिससे रोगी की मृत्यु का भय बराबर बना रहता है।

2. ध्यान रहे-रोग जब तीव्र अवस्था में आ जाता है, तब अकस्मात् ठंडा पसीना आता है और पूरा शरीर ठंडा होकर मृत्यु हो जाना संभावित है।

याद रहे- रोग का पता चलते ही उस पर तुरन्त काबू पा लेना हितकर होता है। सर्वप्रथम कारण की तलाश करें और उसे दूर करें। कब्ज की हरसम्भव चिकित्सा करें। भूख की कमी के लिये दी जाने वाली औषधियाँ प्रयोग करें।

आमाशयिक प्रसार में सेवन कराने योग्य आयु० पेटेन्ट टेबलेट्स

1. गैस्ट्रेक्स (Gastrex) ‘वान

वयस्क 2-3 गोली भोजन के बाद पर्याप्त जल से सेवन करायें। तीव्र अवस्था में 2-2 गोली प्रति 2 घण्टे पर । बालक 1 गोली दिन में 3 बार ।

2. गैसेक्स (Gasex) ‘हिमालया’

2-2 टिकिया दिन में 3 बार अथवा आवश्यकतानुसार दें।

3. सुक्तिन (Sooktin) एलार्सिन’

2-2 टिकिया दिन में 3 बार अथवा आवश्यकतानुसार दें।

4. सर्टिना (Certina) चरक’

आवश्यकतानुसार 1-2 टिकिया दिन में 3 बार।

5. लिव-52 (Liv-52) हिमालया’

1-2 टिकिया दिन में 3 बार अथवा आवश्यकतानुसार दें।

6. लिव फिट (Liv fit) ‘डाबर’

1-2 गोली दिन में 3 बार अथवा आवश्यकतानुसार नियमित रूप से 1-2 माह तक सेवन करायें। इसका ‘लिव फिट’ सीरप भी आता है।

7. अभयासन (Abhayasan) ‘झण्डू

4-8 टिकिया दिन में 2 बार गर्म जल से।

8. गार्लिल पिल्स (Garlill Pills) ‘चरक’

1-2 पिल्स भोजन के तुरन्त बाद जल से सेवन करावें।

9. इवोमिन (Evomine) मेडिकल इथिक्स’

1-2 टिकिया दिन में 3 बार दें।

10. शिवाशुन्थी (Shivashunthi) ‘झण्डू’

2-4 टिकिया दिन में 3 से 4 बार अथवा आवश्यकतानुसार सेवन करायें।

11. विषतिन्दुक वटी (Vishtinduk) झण्डू’

1-4 टिकिया दिन में 3 बार दूध के साथ दें।

आमाशयिक प्रसार में सेवन कराने योग्य आयु० पेटेन्ट कैप्सूल्स

1. विमलिव (Vimliv) धूतपापेश्वर’

1-2 कैप्सूल दिन में 2 बार अथवा आवश्यकतानुसार दें।

2. अग्नि संदीपन (Agnisandipan) ‘मिश्रा’

1-2 कैप्सूल दिन में 2 बार अथवा आवश्यकतानुसार दें।

3. गैसान्तक (Gasantak) ‘गर्ग’

1-1 कैप्सूल सुबह-शाम अथवा आवश्यकतानुसार सेवन करावें।

4. विरेचन (Virechan) ‘गर्ग’

मलावरोध की स्थिति में 1 कैप्सूल रात को सोते समय दें। इसको गर्म दूध या जल से दें।

5. गैसोना (Gasona) ज्वाला’

1-2 कैप्सूल भोजनोपरान्त दें। साथ ही इसी कम्पनी का उदरामृत पेय 2-3 चम्मच दें।

आमाशयिक प्रसार में सेवन कराने योग्य आयु० पेटेन्ट सीरप, तरल एवं ड्राप्स

1. लिव-52 (Liv-52) सीरप ‘हिमालया’

सीरप बड़ों को 1-2 चम्मच दिन में 3 बार। बालक 1/2-1 चम्मच दिन में 3 बार। ड्राप्स नन्हें शिशुओं को 5-10 बूंद दिन में 2 बार।

2. लिव फिट (Liv fit) ‘डाबर’

2-3 चम्मच दिन में 2 या 3 बार दें।

3. बोनीसान (Bonisan) ‘हिमालया’

2-3 चम्मच दिन में 3 बार दें। 1 माह से लेकर बड़े बच्चों को आवश्यकतानुसार दें।

4. वोमीटैब (Vomitab) चरक’

1-2 चम्मच वयस्कों को तथा बच्चों को 1/2-1 चम्मच एवं नन्हें शिशुओं को 10-15 बूंद दें।

5. उदरामृत (Udramrita) ‘ज्वाला’

2-3 चम्मच समान मात्रा में जल मिलाकर दिन में 2 बार भोजनोपरान्त दें।

6. गैसारि (Gasari) पंकज’

2-3 चम्मच समान मात्रा जल मिलाकर दें। बच्चों को आधी मात्रा।

आमाशयिक प्रसार की आयु० अनुभूत चिकित्सा

1. ‘हिमालया’ कम्पनी की ‘लिव 52’ की 1 टिकिया, ‘वान’ कम्पनी की ‘गैसट्रेक्स’ (Gastrex) 1 टिकिया, ‘झण्डू’ कम्पनी की ‘अभ्यासन’ (Abhayasan) 1 टिकिया ऐसी 1-1 मात्रा दिन में 3 बार सेवन करायें।

2. ‘धूतपापेश्वर’ का ‘विमलिव’ (Vimliv)1 कैप्सूल, ‘गैसेक्स’ (हिमालया कम्पनीको टिकिया, ‘चरक’ कम्पनी की ‘सर्टिना’ 1 टिकिया। ऐसी 1-1 मात्रा दिन में 3 बार दें।

3. ‘हिमालया’ कम्पनी का लिव 52 सीरप (Liv-52 Syp.)2 चम्मच ‘चरक’ कम्पनी का ‘वोमीटैब’ (Vomitab) सीरप 1 चम्मच, दोनों को मिलाकर ऐसी 1-1 मात्रा दिन में 3 बार सेवन करायें।

आधुनिक उपचार

इस रोग में मैथीडीन (Methedrin) की 1-2 गोली दिन में 3 बार दें। रोग की बढी हर्ड अवस्था में इसका इन्जेक्शन देना चाहिये। ‘थायरेनोन’ (Thyranon) भी एक उपयोगी /DILATATION OF STOMACH treatment hindi औषधि है। इसकी. 1-1 गोली दिन में 2-3 बार दी जाती है अथवा इसोरिड (Esorid) या ‘रेगलान’ (Reglan) का प्रयोग कर सकते हैं। कुछ लोग इंडोपेस (Endopace), ‘ट्रिफोलेक्सीन’ का प्रयोग करते हैं। यह औषधियाँ टेबलेट के रूप में उपलब्ध हैं।

रोगी को कब्ज न होने दें। इसके लिये कब्जनाशक औषधियाँ दी जा सकती हैं। आवश्यकता होने पर ‘एनीमा’ दिया जाना चाहिये। कब्ज के लिये ‘ग्लिसरीन सपोजीटरी’ का उपयोग किया जा सकता है। रोगी को हल्का भोजन करने का निर्देश दें।