Gas trouble गैस की तकलीफ के लक्षण, कारण, परिणाम, चिकित्सा

Gas trouble का परिचय

पाचन तंत्र में भोजन के पाचन क्रिया के समय अनेक प्रकार के ‘पाचक रस’ उसमें मिलते हैं। इन रसों के मिलने से भोजन के तत्वों में अनेक प्रकार की ‘प्रतिक्रिया’ (Reaction) होती है। इन प्रतिक्रियाओं के फलस्वरूप एक निश्चित मात्रा में वायु उत्पन्न होती है जिसे ‘आन्त्र वायु’ या ‘पेट की गैस/ Gas trouble treatment hindi कहते हैं। आमतौर पर यह गैस/Gas trouble मल के साथ ही बाहर निकल जाती है। किन्तु यदि कब्ज हो तो यह गैस छोटी आँतों और बड़ी आँतों में जमा हो जाती है और आँतों की दीवारों पर दबाव डालती है। गैस की तकलीफ कोई स्वतन्त्र रोग नहीं है, किन्तु पाचन संस्थान की कमजोरी से उत्पन्न होने वाली स्थिति का एक लक्षण है। गुरुतर भोजनों के आन्त्र में विदग्ध होने से गैस उत्पन्न होती है, जो अपान वायु और डकार के साथ बाहर निकलती है।

Gas trouble के प्रमुख कारण

1 भोजन को ठीक से चबाये बिना ही निगल जाना (अपाचित आहार)।

2. भूख से कहीं अधिक भोजन करना।

3. गरिष्ठ आहार का खूब पेट भर खाना ।

4. खाने के समय ज्यादा हवा का निगलना।

5. खाने के समय ढेर सारा पानी या पेय लेते रहने से।

6. मन्दाग्नि एवं अपच।

7. बड़ी आँत्र की शोथ की स्थिति में।

8. चटपटे नमकीन पदार्थ अधिक लेते रहने से गैस/Gas trouble treatment hindi का निर्माण अधिक होता

9. दालों में प्रोटीन अधिक होता है। इनको अधिक लेने से गैस/Gas trouble पैदा होती है।

10. वायु प्रधान भोजन अधिक लेने से।

11. रूखा आहार सेवन करने से।

12. छौंक रहित आहार के सेवन से ।

13. अकर्मण्य जीवन व्यतीत करने से।

14. स्थूलता भी एक गैस/Gas trouble उत्पादक कारण है।

15. रहन-सहन के बहुत ही अव्यवस्थित रहने एवं पर्याप्त निद्रा के अभाव में।

16. टिफिन या लंच बॉक्स का भोजन करने से।

17. शाम और दोपहर के भोजन के बाद कुछ घूमना-टहलना एवं विश्राम के अभाव में।

18. मानसिक तनाव।

Gas trouble के प्रमुख लक्षण

गैस की तकलीफ में मुख्य लक्षण इस प्रकार होते हैं-

1. अधिक मात्रा में अपान वायु का निकलना।

2. अधिक डकारों का आना।

3. हिचकी आना।

4. गैस/Gas trouble के अधिक भरने से पेट फूल जाता

5. गैस/Gas trouble अवरोध के प्रभाव से हृदय की धड़कन का बढ़ना, साँस लेने में रुकावट एवं कठिनाई से साँस लेना।

6. आमाशय की वायु प्रकोप से हृदय, नाभि, पार्श्व एवं उदर में पीड़ा होती है।

7. वमन, प्यास एवं कंठ तथा मुँह के अनेक रोग।

8. पेट और छाती में जलन, बेचैनी, घबराहट आदि उपद्रवों का जन्म होता

9. अनिद्रा/नींद न आना।

10. गैस/Gas trouble महिलाओं में बाँझपन का कारण भी

11. भोजन के बाद पेट भारी हो जाता है।

12. कभी-कभी गैस/Gas trouble के कारण हाथ-पैर में स्फुरण होता है।

13. कभी-कभी रोगी को एकाएक सर्दी हो जाती है और अत्यधिक छींकें आने लगती हैं।

14. मुँह से लार टपकना, मुँह में बार-बार थूक आना, मुँह में पानी आना, मुँह का बेजायका बना रहना, छाले पड़ना आदि गैस/Gas trouble के कारण ही होता है।

यदि मल मलाशय में अपाचित अवस्था में पड़ा रहे और उसका समय पर शरीर से बाहर निष्कासन न हो तो वह सड़ता रहता है और उससे गैस/Gas trouble treatment hindi बनती है। यह गैस नीचे से होकर निकलती है। यदि गैस अधिक मात्रा में हो और वह पर्याप्त मात्रा में नीचे से बाहर न निकल पाये तो वह ऊपर की ओर चढ़ती है अथवा नीचे का मार्ग चिकने मल से अवरुद्ध होने की स्थिति में यदि गैस नीचे से न निकल पाये तो वह भी ऊपर की ओर चढ़ने लगती है। इस प्रकार ऊपर बढ़ी हुई गैस जिन-जिन अंगों में पहुँचती है, वहाँ-वहाँ अपना असर दिखाती

यदि गैस सीने में भर जाये तो- घबराहट होती है, रोगी पसीने में तरबतर हो जाता है। सीने में दर्द होता है कि प्राण बचेंगे या नहीं, ऐसा लगता है।

जब गैस सीने से ऊपर सिर तक पहुँच जाती है- सिर भारी-भारी रहने लगता है, सिर जकड़ जाता है उसमें तीव्र वेदना उठती है, बेचैनी होती है।

यदि गैस दायें या बायें पार्श्व में प्रविष्ट हो जाये तो- गैस/Gas trouble treatment hindi जिस पार्श्व में पहुँचती है वहाँ दर्द होता है, वह भाग भारी हो जाता है। रोगी को सिर्फ लेटे रहने की इच्छा होती है।

यदि गैस आँत में घुमड़ती है तो- गड़गड़ाहट जैसी आवाज सुनाई देती है, दर्द होता है।

पेडू, पेट और पार्श्व में जहाँ भी वायु भर जाती है- वह भाग उभरा हुआ दिखायी देता है, वह भाग भारी हो जाता है। गैस/gas की मात्रा अधिक होने पर वहाँ दर्द भी होता है।

सिर पर गैस चढ़ जाये तो- चक्कर आने लगते हैं।

Gas trouble की तकलीफ की चिकित्सा विधि, पथ्य एवं सहायक चिकित्सा

चिकित्सा विधि

गैस की तकलीफ एक महाव्याधि है। गैस की तकलीफ जिन कारणों से होती है उन कारणों को दूर करना ही सही चिकित्सा है। गैस/gas से बचने के लिये सबसे पहले खानपान की गति को सुधारना आवश्यक है। भोजन के प्रत्येक कौर को 32 बार चबा-चबाकर खायें । खाने के साथ पानी या पेय का सेवन 1 गिलास से अधिक न करें। यदि गैस/gas की शिकायत कब्ज के कारण हो तो सबसे पहले कब्ज दूर करें। इसके लिये ईसबगोल और बेलगिरी का चूर्ण लेना उचित रहता है।

पथ्य एवं सहायक उपचार

कार्बोनेटिड पेय (लिम्का/पेप्सी/कोकाकोला) बीयर, मिल्क केक आदि से परहेज करना चाहिये। क्योंकि यह गैस/gas बढ़ाने वाले पदार्थ हैं। मैदे के बजाय मोटा आटा और मील के चावल के बजाय बिना पॉलिंश के चावल खायें। दालें (विशेषकर-अरहर, चना, मटर, मसूर) और आलू के सेवन से गैस/gas बनती है। दालों को 12 घण्टे भिगोने के बाद ही प्रयोग में लायें। तला हुआ एवं मसालेदार पदार्थों का सेवन करना बंद कर देना चाहिये।

सहायक चिकित्सा के रूप में– पाचनतंत्र के पिछले अवयवों में संचित और शरीर को कष्ट देने वाली गैस को नीचे से यानी उसके अपने मार्ग से बाहर निकालने का एकमात्र योगासन पवन मुक्तासन है। इस आसन से पेट में भरी हुई गैस/gas निकल जाती है। इसके अलावा इस आसन से पेट के मेद में कमी, कब्जियत का नाश और पाचनतंत्र में सुधार आदि कई लाभ होते हैं।

गर्भावस्था, प्रसूतावस्था और माहवारी के दौरान महिलायें यह आसन न करें।

Gas trouble नाशक आयुर्वेदिक पेटेन्ट टेबलेट्स

1. गैसट्रोइन (Gastroin) ‘आर्या’

1-2 टिकिया दिन में 3 बार भोजन के बाद दें।

2. आयुर्गासील (Ayurgaseel) हील’

2-2 टिकिया दिन में 2-3 बार आवश्यकतानुसार दें।

3. सुक्तिन (Sooktyin) ‘एलार्सिन कं०

2-2 गोली भोजन के बाद अथवा बीच में लें। बच्चों को 1/2-1 गोली।

4. इमिसेडोन (Imisedon) ‘कामिस’

2-2 टिकिया दिन में 2-3 बार या आवश्यकतानुसार दें।

5. गैसेक्स (Gasex) ‘हिमालय ड्रग्स कं०

2-2 गोली भोजनोपरान्त दें। रोग की तीव्रावस्था में 1-2 गोली प्रति 1/2 घण्टे पर। अधिकतम 10 गोली 24 घण्टे में।

6. गैसान्तक वटी (Gasantak Vati) वैद्यनाथ’

2-3 गोली दिन में 3-4 बार।

7. गैसोलेक्स (Gasolex) ‘हर्बल लेबोरेटरीज’

2-2 गोली दिन में 3-4 बार।

8. गैस्ट्रोलोन (Gastrolone) ‘तुलीसिन फार्मा’

2-2 गोली गरम जल से। बादी एवं गैस/gas पैदा करने वाली चीजों से परहेज करें।

9. गैस्ट्रोक्स (Gastrox) ‘यूनेक्सो’

1-2 गोली दिन में 3 बार गर्म जल से भोजन के बाद दें।

10. कार्मीवैल (Carmiwel) ‘यमुना फार्मेसी’

2-3 गोली गरम जल से भोजनोपरान्त दें।

11. गैसोल (Gasol) ‘संजीवन रिसर्च कं०

2-3 गोली भोजन के बाद गर्म जल के साथ दें।

नोट- जो आयुर्वेदिक पेटेन्ट औषधियाँ आध्यमान (5) में बताई गई हैं वह सब गैस/gas ट्रबल में लाभकारी हैं।

Gas trouble नाशक कैप्सूल

1. गैसोना कैप्सूल ‘ज्वाला’

1-2 कै० भोजन के बाद दिन में 2-3 बार गर्म जल से दें।

Gas trouble नाशक पेटेन्ट पेय/सीरप

1. हर्बो कार्मिन सीरप (Herbo Carmin Syrup) आर्या

2-2 टिकिया दिन में 2-3 बार आवश्यकतानुसार दें।

2. डिलाप्सिन (Dilapsin) ‘सोलूमिक्स’

2-4 चम्मच दिन में 3-4 बार।

3. गैसोन लिक्विड (Gason Liquid) ‘नि० नागार्जुन’

2-3 चम्मच दिन में 3 बार।

4. गैसारि पेय (Gasari Liquid) ‘पंकज फार्मा

1-2 चम्मच समान जल के साथ।

नोट- जीर्ण प्रवाहिका में भी गैस रहती है, उसकी चिकित्सा से गैस/Gas trouble treatment hindi का रोग ठीक होता है।

याद रहे- गैस के रोगी को अपना रहन-सहन बहुत ही व्यवस्थित रखना चाहिये। उसे कम से कम 6 से 8 घण्टे की नींद लेना आवश्यक होता है (24 घण्टे में) | बेमतलब जागरण न करें। शाम के समय कुछ जल्दी भोजन करके और थोड़ा घूमने-फिरने के बाद सो जाना चाहिये। शहर के लोगों एवं बड़ी-बड़ी कम्पनियों में नौकरी करने वाले कर्मचारियों को टिफिन और लंच बॉक्स का भोजन नहीं करना चाहिये।

Gas trouble नाशक कम्बीनेशन थेरॉपी

1. वैद्यनाथ की गैसान्तक वटी 1, गैसोना कैप्सूल 1 (ज्वाला), गैसेक्स टेबलेट (हिमालय ड्रग्स कं०) 2 टिकिया। ऐसी एक मात्रा दिन में 3 बार 3-4 सप्ताह तक लगातार देते। रहने से गैस/gas बनना बन्द हो जाता है।

नोट- रोगी को प्रोटीनयुक्त आहार विशेषकर दालें सेवन नहीं करनी चाहिये। अरबी तथा आलू का सेवन भी वर्जित है।

2. हर्बल लेबोरेटरीज की गैसोलेक्स 2 टिकिया, गैसेक्स (हिमालय ड्रग्स कं०) की 1 टिकिया-ऐसी एक-एक मात्रा दिन में 3 बार देने से गैस के रोगी को आशातीत लाभ मिलता

3. गुडमैन्स का गैस्ट्रोन कम्पाउण्ड 2 चम्मच, हर्बल कं० का हर्बोजाइम 2 चम्मच-दोनों को मिलाकर ऐसी एक-एक मात्रा दिन में 2 या 3 बार दें।

Gas trouble नाशक अनुभूत योग

1. जिन्हें स्थायी रूप से गैस की शिकायत रहती है, उन्हें भोजन के बाद समान मात्रा में सोंठ और हर्र का चूर्ण 1-1 चम्मच लेना चाहिये।

2. दो नीबू लेकर उन्हें आधा-आधा काट लें। एक पर काली मिर्च के चूर्ण की, दूसरे पर सैंधव नमक के चूर्ण की, तीसरे पर डिकामाली के चूर्ण की और चौथे पर काले नमक की ढेरी बनाइये। फिर उन्हें आग पर सेंक लें। इन टुकड़ों को एक-एक कर प्रतिदिन प्रातःकाल , गर्म-गर्म चूस जायें। गैस की शिकायत कम करने के लिये यह एक उत्तम प्रयोग है।

Gas trouble नाशक इन्जेक्शन चिकित्सा

आयुर्वेदिक सुई ‘अदरकं’ या अजवाइन खुरासानी की 1-2 मिली लीटर की सुई माँस में नित्य लगाने से भी लाभ हुआ करता है।

आधुनिक उपचार

इस रोग की चिकित्सा ‘आध्यमान’ के समान करनी चाहिये। जैसा कि ‘आध्यमान के प्रकरण में बताया गया है। | गैस की तकलीफ जिन कारणों से होती है उन कारणों को दूर करना ही सही चिकित्सा है। गैस से बचने के लिये पहले खान-पान की गति को सुधारना ही सही चिकित्सा है।