Gaseous Tumour: वायुगोला के लक्षण, कारण, परिणाम, चिकित्सा

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वायुगोला परिचय/Gaseous Tumour introduction

यदि मलाशय में स्थित मल समय पर बाहर न निकले, तो वह मलाशय में सड़ने लगता है जिससे गैस उत्पन्न होती है। अफरा (Flatulence) में गैस पेट में जमा होती है और पूरा पेट ढोल जैसा हो जाता है। वायुगोला/Gaseous Tumour की समस्या होने लगती है

वायुगोला के लक्षण/Symptoms of Gaseous Tumour

जब वायु गोले में आँत के अमुक हिस्से में वायु इकट्ठा हो जाता है तब वह हिस्सा गेंद या गोले की तरह उभर आता है। दबाने से यदि यह गोला अधिक उभरा हुआ हो तो बाहर से भी उसे देखा जा सकता है। किन्तु यदि छोटा हो तो पेट पर हाथ फेरने या दबाने से भी जाना जा सकता है। दबाने से गोला सरकता है। यानी जिस प्रकार पेट में गाँठ होती है और वह एक ही स्थान पर स्थिर रहती है, उस प्रकार वायुगोला/Gaseous Tumour treatment hindi एक ही स्थान पर स्थिर नहीं रहता। यदि वह थोड़ा नरम होता है, तो दबाने से दबकर बैठ भी जाता है। हर बार आँत में वह एक ही जगह हो ऐसा भी नहीं है। वह कई बार आँत में ही अपना स्थान बदलता रहता है फिर वह कभी छोटा होता है तो कभी बड़ा भी होता है। कई बार वह गोले जैसा नहीं होता, किन्तु लंबगोल या लम्बे उभरे हुए भाग जैसा कुछ मालूम होता है। कई बार वह अमुक समय के बाद अपने आप बैठ जाता है, तो कई बार कई दिनों तक बना रहता है। तत्पश्चात् उसमें निम्नलिखित लक्षण भी देखने को मिलते हैं

1. वायु के कारण पेट में गुड़गुड़ाहट होती है।

2. पेट में अफारा जैसा मालूम होता है।

3. भोजन के प्रति अरुचि होती है।

4. मल और मूत्र त्याग के समय तकलीफ होती है।

5. रोगी को बार-बार डकारें आती हैं। ऐसा तभी होता है जब वायु नीचे जाने के बदले ऊपर चढ़ती है। साथ ही उबकाइयाँ या हिचकियाँ आया करती हैं।

6. भोजन करने के बाद पेट में अचानक असाध्य दर्द उठता है, जो धीरे-धीरे घटता जाता है। प्रायः वायुगोला/Gaseous Tumour treatment hindi दोनों पार्श्व, हृदय, नाभि प्रदेश और वस्ति प्रदेश इन अवयवों में होने वाली वेदना में प्रकुपित वायु अपने प्रभाव द्वारा वेदना और फैलाव पैदा करता है।

वायुगोला चिकित्सा सिद्धान्त/Gaseous Tumour Treatment

वायुगोले का रोग पाचनतंत्र की रुक्षता और वायु के बढ़ जाने के कारण होता है। अतः उसके शमन के लिये पाचनतंत्र के अंगों को स्निग्ध करने की आवश्यकता होती है। इसके साथ ही वायु उत्पन्न हो, इसके लिये तत्सम्बन्धी उपचार भी करना होता है। वायुगोले के रोगी को आहार बन्द करके केवल गर्म-गुनगुना पानी पीना चाहिये। इससे आम पाचन और वातानुलोमन होकर गोला बैठ जाता हैं।

वायुगोला पथ्य एवं सहायक चिकित्सा/Gaseous Tumour Treatment hindi

वायुगोला/Gaseous Tumour treatment hindi के रोगी को भोजन गर्म ही लेना चाहिये। उसमें चिकनाहट के लिये घी या तेल डालें। तत्पश्चात् आहार में अदरक, हरा-सुखा लहसुन, हरा धनिया, हींग, राई, मेंथी आदि का सेवन करें। साथ ही पुराने चावल, मूंग की दाल, सहिजन, दूध, घी, अंगूर, मक्खन, छाछ आदि का उपयोग करें। परं सेम, मटर, उडद लोविया जैसे दलहनों, तले हुए पदार्थों, वासी आहार का सेवन न करें। सहायक उपचार के रूप में 1-2 लीटर पानी को गुनगुना गर्म करके अरंडी या तिल का तेल 250 ग्राम डालकर एनीमा दें। इससे मलाशय में भरा मल निकल जाता है एवं वातानुलोमन होकर गोला बैठ जाता है।

नोट- मल त्याग की इच्छा होने पर उसके वेग को रोकना नहीं चाहिये, क्योंकि मल त्याग की हाजत को रोकने से वात प्रकोप होता है और वायगोला चढता है।

वायुगोला में उपयोगी आयु० पेटेन्ट टेबलेट्स/Patent tablets in Gaseous Tumour

1. गैसेक्स (Gasex) ‘हिमालय ड्रग्स’

2-3 गोली भोजन के बाद । रोग की तीव्रावस्था में 1-2 गोली प्रति 1/2-1 घण्टे पर। बच्चों को 1/2-1 गोली।

2. टेबलेट गैस्टोमोन

1 टिकिया दिन में 3 बार।

3. टेबलेट एसीडिनोल (Acidinol) (B.A.N.)

1-1 टिकिया दिन में 3 बार।

4. टेबलेट झण्डूजाइम (Zanduzyme) ‘झण्डू

2 टिकिया दिन में 3 बार ।

5. गैसोलेक्स (Gasolex) हर्बल लेवो.’

2-3 गोली दिन में 3-4 बार।

6. गैसट्रीन (कोटेड) ‘आर्य’

1-2 गोली दिन में 2 बार भोजन के बाद ।।

7. कार्मिवैल (Carmiwel) ‘यमुना फार्मेसी’

2-3 गोली गर्म जल के साथ दिन में 3 बार दें।

नोट- इस रोग में वे सारी दवायें उपयोगी हैं जो अफारा (Flatulence) तथा गैस की तकलीफ (गैस ट्रबल्स) में बतलायी गई हैं।

वायुगोला की आयुर्वेदिक सरल अनभत चिकित्सा

1. वायुगोला में अजवाइन, सेंधा नमक, पीपरामूल, सोडाबाईकार्ब समान मात्रा में मिलाकर 2-2 ग्राम दो बार गुनगुने पानी के साथ लेने से लाभ होता है।

2. रोगी को जिस समय वायुगोला/Gaseous Tumour treatment hindi चढ़ा हो, कपड़े को गर्म करके अथवा गर्म पानी की थैली या अन्य किसी भी साधन से वहाँ सेंक करना चाहिये। सेंक से वायुगोला हल्का पड़ जाता। है एवं सेंक के साथ ही 5 से 7 ग्राम घी गर्म करके उसमें चुटकी भर हींग या काला नमक डालकर रोगी को पिला दें। इससे वायु की वृद्धि कम होगी।3. वायुगोले के रोगी को आहार बन्द करके केवल गरम गुनगुना पानी पीना चाहिये। इससे आमपाचन और वातानुलोमन होकर गोला बैठ जाता है।

4. वायुगोला/Gaseous Tumour treatment hindi में हिंग्वाष्टक चूर्ण, दाडिमाष्टक चूर्ण, लवण भाष्कर चूर्ण, रसोनादि वटी, शंख वटी, चित्रकादि वटी, हिंगकर्पूर वटी, हिंग्वादि चूर्ण, हिंग्वादि वटी का उपयोग करना चाहिये।

नोट- भोजन के मध्य में गर्म चावल जरा सा घी डालकर खायें। वायुगोला/Gaseous Tumour अधिक हो तो चावल में घी के साथ हिंग्वाष्टक चूर्ण मिलाकर उसके कौर का सेवन करें।

वायुगोले में करके देखें अवश्य लाभ मिलेगा- रात को भोजन के बाद 25-50 ग्राम तिल का तेल या अरण्डी का तेल अथवा दोनों का गर्म किया हुआ मिश्रण ग्लिसरीन सिरिन्ज में भरकर गुदा मार्ग से चढ़ा देना चाहिये। प्रातःकाल मल त्याग साफ होगा और वातानुलोमन होकर वायुगोला/Gaseous Tumour बैठ जाता है।

वायुगोला आधुनिक उपचार

वायुगोला/Gaseous Tumour की चिकित्सा पूर्व बताई गई ‘अफारा‘ के अन्तर्गत दवा के समान है। अतएव इसकी चिकित्सा ‘अफारा’ के अनुसार करें।