Gastric ulcer

Gastric ulcer परिचय

इसका अर्थ है-“आमाशय (Stomach) में व्रण” इसमें आमाशय में ऊपर, बीच में या बिलकुल नीचे के भाग में व्रण (घाव, छाला-ulcer) हो जाता है। गैस्ट्रिक अल्सर को आमाशय क्षत या आमाशय व्रण कहा जाता है। गैस्ट्रिक अल्सर/Gastric ulcer treatment hindi को पेप्टिक अल्सर भी कहते हैं।

Gastric ulcer treatment hindi के प्रमुख कारण

इसके होने का प्रमुख कारण एसिड (Acid) बनना या बढ़ना है। शराब पीना, माँस खाना, मसाले वाला चटपटा खाना लाल मिर्च ज्यादा खाना, तम्बाकू और चूना मिलाकर उसे मसल कर खाना, अरहर की दाल, उड़द की दाल, खट्टे सन्तरे, खट्टे आम, खट्टे अंगूर, अमचूर की खटाई का सेवन करते रहने से एसिड बनकर बढ़ता रहता है। नींबू, आम का अचार, खट्टी चटनियाँ या खट्टा दही एसिड बनाते हैं। फलस्वरूप ये व्रण बन जाते

Gastric ulcer treatment hindi के प्रमुख लक्षण

इस रोग में पेट में हल्का-हल्का दर्द होता रहता है। दर्द जो हल्के रूप में प्रारम्भ होता । है खाने के आधे घण्टे बाद बहुत बढ़ जाता है और भोजन के द्वारा बाहर निकल जाता । है। रोगी अपने आप भी कै करने की कोशिश करता है क्योंकि के आने के बाद पेट दर्द शान्त हो जाता है। कण्ठ, पेट और छाती में जलन होती है। सन्धि वात या आमवात के – रोगी यदि लम्बे समय तक गर्म दवाओं का सेवन करते रहें, तो उससे एक लम्बे अरसे के बाद पेट में अल्सर हो जाता है। शराब भी इसका मुख्य कारण है।

Gastric ulcer treatment hindi कुछ विशेष कारण

1. कॉफी और कोकाकोला, पेप्सी जैसे कफिन वाले द्रव्य भी पेट में अल्सर पैदा करते हैं।

2. कोलतार (Coltar) या उससे बने हुए पदार्थों का सेवन करने से अल्सर बहुत शीघ्र होता है। ऐसे पदार्थों में जलाब की अंग्रेजी दवाइयाँ, नींद की गोलियाँ. सिन्थेटिक विटामिन्स, एस्प्रिन आदि का समावेश होता है। कोलतार पैट्रोलियम पदार्थ है।

3. सर्दी, जुकाम और दमे के रोगियों को भी गर्म दवायें लेनी पड़ती हैं। इन दवाओं का और विशेष कर एलोपैथिक दवाओं का अल्सर पैदा करने में बहुत बड़ा हाथ होता है।

4. आजकल अल्सर रोग से ग्रस्त अधिकांश रोगियों में अल्सर का मुख्य कारण मानसिक माना जा रहा है।

Gastric ulcer treatment hindi चिकित्सा विधि

1. रोग का निर्णय होते ही चिकित्सा प्रारम्भ कर दी जानी चाहिये। रोगी को पूर्ण आराम और पूर्ण एहतियात से रखना चाहिये। अल्सर के रोगी को अधिकांश समय बिस्तर पर ही रहने का निर्देश दें। यहाँ तक कि मल-मूत्र त्यागने की व्यवस्था भी बिस्तर ही करायें। यदि इस प्रकार की व्यवस्था न हो सके तो रोगी को किसी सुविधा सम्पन्न अस्पताल में रोग नियंत्रण होने तक रखना चाहिये।

2. रोगी के आमाशय से वमन के रूप में जो कुछ भी निकले, उसकी ‘पैथोलोजिकल’ परीक्षा अवश्य करवायें ताकि पता चल सके कि उसमें रक्त तथा मवाद आदि तो नहीं। पाचक रस की परीक्षा में गंध, मात्रा, अम्ल की मात्रा, जीवाणु आदि की पूर्ण परीक्षा की जानी चाहिये।

3. यदि मुख और गले का कोई रोग पायोरिया, टॉसिल्स आदि हों तो उनकी तत्काल रोकथाम करनी चाहिये।

4. यदि रोगी को कब्ज की शिकायत हो तो उसको सबसे पहले दूर करना चाहिये। इसके लिये हल्के विरेचक का व्यवहार किया जा सकता है।

5. ध्यान रहे, वेदना के लिये एस्प्रिन को भूल कर भी प्रयोग न करें। रोगी को ठंडा से बचायें।

Gastric ulcer treatment hindi पथ्य एवं सहायक चिकित्स

रोगी के पथ्य और अपथ्य की ओर सतर्क रहना चाहिये। अपथ्य से रोगी का जीवन तुरन्त संकट में पड़ सकता है। रोगी को अपना भोजन चबा-चबा कर खाना चाहिये। तेल, घी, मिर्च, मसालेदार खाद्य वर्जित करा दें। भोजन समय पर सन्तुलित मात्रा में करना चाहिये। व्यसन एकदम रोक देना चाहिये। गरिष्ठ भोजन से भी दूर रखें, चाय, कॉफी पीना भी बन्द करा दें।

1. रोगी का भोजन ऐसा होना चाहिये जो आसानी से पचाया जा सके। कुछ चिकित्सक गर्म ठंडे दूध में आपत्ति नहीं करते। कुछ चिकित्सक ठंडा दूध पीने की सलाह देते हैं। चाय, कॉफी ठंडी ही पीने को कहते हैं। वैसे गुनगुना दूध पिया जाना चाहिये। रोगी को सेब का मुरब्बा प्रयोग कराना श्रेष्ठ है। सब्जियों को उबाल कर उसका पानी देना हितकर है। फलों का जूस दिया जा सकता है। एस्कोर्बिक एसिड दूध के साथ नियमित जारी रखना चाहिये।

2. एमीनो एसिड पेप्टिक अल्सर के लिये हितकर है। रोगी को रात को ‘फीनोबार्बीटोन’ देना ठीक रहता है। विटामिन ‘सी’ दिन में 2 बार दें। अल्सर के रोगी को पेट में जलन होती है, अतः उसे आहर में मिर्च का प्रयोग बिलकुल बन्द कर देना चाहिये। लहसुन, प्याज, रायता, अचार, छौंक में मिर्च तथा मिर्च आदि का त्याग कर देना चाहिये। अल्सर के रोगी को एकदम सादा भोजन करना चाहिये। यथासंभव तरल या अर्ध तरल का सेवन उत्तम रहता है।

* अल्सर की चिकित्सा में मुख्य तथ्य यह है कि अम्लता (Acidity) उत्पन्न ही न हो। दूध अम्लता कम करता है। रोगी को तीव्र विरेचक कभी न दें।

Gastric ulcer treatment hindi अनुभव सिद्ध बात

चिकित्सकों की राय है कि निम्न 5 से रोगी को बचाना चाहिये

1. धूम्रपान (Smoking)

2. वनस्पति घी की मिठाइयाँ

3. मसाले वाली सब्जियाँ या माँस का रस (Soup)

4. खट्टी चीजें खाना

5. मसाले वाली चटपटी चीजें खाना।

खाने को ये चीजें देना बेहतर है

मीठी मौसम्मी का रस, मीठा सन्तरा, मीठे अंगूर या उनका रस, और गन्ने का मीठा रस (100 मिलीलीटर तक)दें। पुराने चावलों का भात दे सकते हैं। हल्के से फुल्के भी ताजे जल में 1-2-3 चम्मच ग्लूकोज डी घोलकर पिलवा दें। मूंग की दाल का पानी दे सकते हैं।

एक सर्वेक्षण द्वारा ऐसा मालूम हुआ है कि एक बार अल्सर मिट जाने के बाद भी यदि पर्याप्त सावधानी न बरती जाये तो 80% रोगियों को वह फिर अपनी चपेट में ले लेता है।

आमाशय या पक्वाशय व्रण में सेवन कराने योग्य आयुर्वेदिक पेटेन्ट टेबलेट

1. एसीडोन (Acidon) धन्वन्तरि’

2-3 टिकिया दिन में 3 बार।

2. बेल्सर (Belsur) ‘Vedant’

1-2 गोली दिन में 3 बार । यह गैस्ट्रिक अल्सर/Gastric ulcer treatment hindi तथा ड्यूडेनेल अल्सर दोनों में समान रूप से उपयोगी है।

3. मुक्ताजेम (Muktagem) ‘व्यास’

2-2 टिकिया दिन में 3 बार।

4. रौप्य सुवर्ण भूतशेखर ‘औषधि भण्डार’

1 टिकिया दिन में 2 बार चीनी मिले दूध के साथ दें।

5. सूक्तिन (Sooktyn) ‘अलार्सिन’

2-2 टिकिया दिन में 3 बार भोजनोपरान्त जल से।

6. अम्लान्तक (Amlantak) ‘त्रिगुनायु’

2-2 टिकिया दिन में 3 बार।

7. टेबलेट अभ्यासन (Abhayasan) ‘झण्डू

4-8 गोली दिन में 2 बार।

8. गैसनोल (Gasnol) हिमाचल’

2-2 टिकिया दिन में 3 बार अथवा आवश्यकतानुसार दें।

9. अल्सारेक्स (Alsarex) ‘चरक’

2-2 टिकिया दिन में 3 बार।

10. आमलकी टेबलेट (Amlki Tab.) एमिल

2-2 टिकिया दिन में 2-3 बार दें।

11. कोलेक्स (Colex) ‘आर्या’

1-2 टिकिया दिन में 3 बार ।

12. गैस्ट्रोइन (Gastroin) आर्या’

1-2 टिकिया दिन में 3 बार।

13. गारनिन (Garnin) यूनाइटेड’

1-2 टिकिया दिन में 3 बार भोजनोपरांत । तीव्रावस्था में 4-4 घण्टे के उपरान्त 2-2 टिकिया सेवन करायें। 2-2 टिकिया दिन में 3 बार।

14. एसीडिनोल (Acidinol) भारतीय औषधि निर्माणशाला’

2-2 टिकिया दिन में 3 बार।

15. गैस्सो टेब. (Gasso Tab.) ‘ग्लोब’

2-2 टिकिया दिन में 3 बार भोजन के बाद।

16. एन्टाजाइम (Antazyme) ‘जी फार्मा’

2-2 टिकिया दिन में 3 बार।

17. एसीड्रेक्स (Acidrex) भारतीय महौषधि संस्थान’

1-2 टिकिया दिन में 3-4 बार।

18. पेप्टिलिन (Peptilin) आर्या’

2-2 टिकिया दिन में 3 बार।

19. इमिसेडोन (Imisedon) लमिस’

2-2 टिकिया दिन में 3 बार।

आमाशय या पक्वाशय व्रण में सेवन कराने योग्य आयु० पेटेन्ट पेय/सीरप/तरल

1. डाइजेस्टर (Digester) मैक’

3-3 चम्मच दिन में 2 बार भोजन के बाद अथवा आवश्यकतानुसार दें।

2. कार्मिनेटिव मिक्श्चर (Carminative

2-2 चम्मच बराबर मात्रा में जल मिलाकर mixture) सिंथोकेम’ भोजनोपरान्त दिन में 3 बार दें।

3. गैस्ट्रोजाइम लिक्विड (Gastrozyme liquid) एसैप्टिक’

वयस्कों को 2 से 3 चम्मच जल के साथ दिन 3 बार खाना खाने के बाद सेवन करायें। बच्चों को आवश्यकतानुसार दें। गर्भावस्था में दे सकते हैं।

आमाशय व्रण एवं पक्वाशय व्रण की मिश्रित चिकित्सा

1. टेबलेट एसीडिनोल (Acidinol) 1 टिकिया + टेबलेट गैस्ट्रेक्स (Gastrex) टिकिया-ऐसी एक-एक मात्रा दिन में 3 बार भोजन के बाद दें।

2. टेबलेट अलसारेक्स (Alsarex) 2 टिकिया + टेबलेट वोमीटेब (Vomi Tab.)2 टिकिया-ऐसी एक-एक मात्रा दिन में 3 बार भोजन के बाद जल से दें।

आवश्यक निर्देश

1. रोगी को 1 सप्ताह पूर्ण विश्राम दें।

2. रोगी को आहार के रूप में हर दो घण्टे पर दूध 1 चम्मच स्टावरेक्स (Stavrex) नि० ‘झण्ड’ मिलाकर दें। स्टावरेक्स ग्रेन्यल्स के रूप में आता है।

3. मिर्च और मसाला कम से कम 1 साल तक रोगी को न दें।

4. चाय, कॉफी, मद्यपान (Alcoholic drinks), धूम्रपान, इन सबको किसी भी कीमत पर न लेने की सलाह दें।

5. एस्प्रिन, बूटाजोलाडिन, कोर्टि कोस्टेरॉयड मुख द्वारा न लें।

Domestic RemedyRx

Water obtained from green fruit of coconut 100 ml to 500 ml BD. Rx Powder of dry Amla 1 to 3 grams TDS To milk.

सावधान-आजकल अल्सर के लिये आधुनिक दवाओं में ‘सीमेटीडीन’ की दवा काफी प्रचलित है किन्तु इस दवा के अनेक प्रति प्रभावों (Side effects) की जानकारी भी मिली है। यदि कोई गर्भवती महिला इस दवा का सेवन करती है तो गर्भस्थ शिशु का पूर्ण विकास नहीं हो पाता। यदि पुरुष लम्बे समय तक इस दवा का सेवन करता है तो उसका सीना उभरकर विकसित हो जाता है और उसमें स्त्रीत्व के चिन्ह प्रकट होते हैं। पुरुष के शुक्राणु कम हो जाने से उसकी संतानोत्पत्ति की क्षमता नष्ट हो जाती है। गुर्दे की बीमारी से पीड़ित रोगी को भी सीमेटीडीन दवा का प्रयोग नहीं करना चाहिये।

उत्तम दवा की तुलना में आयुर्वेद की उपरोक्त औषधियाँ और प्रयोग हानिरहित और अधिक हितकारी हैं। यदि ये औषधियाँ और परहेज धैर्यपूर्वक जारी रखे जायें तो अल्सर अवश्य मिट जाता है और अल्सर का ऑपरेशन करने की जरूरत नहीं पड़ती है।

नवीन अनुसंधान इंग्लैण्ड के डॉ० डेविड लुइस कहते हैं कि पेट के व्रणों में केला अत्युपयोगी है। पहले एक पका केला खिलायें। तत्पश्चात् 1-2 घण्टे बाद मीठा दूध पिलायें। इसके बाद में हरे कच्चे केले की सब्जी के साथ रोगी को हल्का खाना खिलवायें।

इस रोग में लापरवाही बरतना खतरे से खाली नहीं है-इसमें रोगी को खाना खाते समय तो दर्द होता है पर यह दर्द थोड़ी देर के लिये ठीक हो जाता है, किन्तु दो घण्टे बाद फिर दर्द होने लगता है। कभी-कभी तो यह दर्द बहुत तेज होता है। दर्द के मारे रोगी पेट पकड़ लेता है। आगे या पीछे झुकने से आराम आता है। दर्द की तेजी में थोड़ा-सा दूध पिलवा देने से आराम मालम होता है। यदि दर्द लम्बे समय तक चलता रहे तो रोगी को दूसरी बीमारियाँ भा आ घेरती हैं। इसलिये इसके इलाज में लापरवाही बरतना खतरों से खाली नहीं है।

Gastric ulcer आधुनिक उपचार

अल्सर gastric treatment hindi के रोगी में बहुत बार रोगी को अस्पताल में दाखिल करके उसका इलाज किया जाता है। रोगी को कम से कम 8 घण्टे सोना चाहिये। अल्सर का दर्द अधिकतर खाली पेट होता है, इसीलिये रोगी को हर 3 से 4 घण्टे में कुछ खाने की सलाह दें। अल्सर Gasttric ulcer treatment hindi में एन्टासिद्ध का प्रयोग बहुत लम्बे समय से हो रहा है। यह दवायें क्षारीय होती हैं जो गैस्ट्रिक अम्लता को सामान्य करके उसका pH बढ़ा देती हैं। यह सब गोली या पीने की दवाई के रूप में आते हैं। इसमें ‘एसीगार्ड जैलूसिल जैल ‘MPS’ जाइमेट्स आदि प्रमुख हैं। अन्य दवाओं में रेनीटिडीन’ (Renitidine) एक सुरक्षित और जल्दी असर करने वाली दवाई है। यह दवाई लम्बे समय तक असर दिखाती है। इसकी 150 mg की गोली सुबह-शाम या 300 मिग्रा. रात में सोते समय दिया जाना चाहिये। इसको 6 से 8 सप्ताह तक देते हैं उसके बाद 150 मिग्रा. की 1 गोली रात में सोते समय दें जिससे अल्सर बाद में न हो। फेमोटिडीन (Femotidine) भी एक बहुत ही कारगर दवाई है। इसको लेने के बाद गैस्ट्रिक एसिड व पेप्सिन का स्राव कम हो जाता है। इसकी 20 मिग्रा. की 1 गोली सुबह-शाम या 40 मिग्रा.की 1 गोली रात में सोते समय दी जानी चाहिये। शुरू में 2 महीने दें उसके बाद 20 मिग्रा. रात में 6-12 महीने तक। यह औषधि टेबलेट फेमोसिड (20, 40 mg) टेबलेट फेमटेक, इन्जेक्शन फेसिड (Facid)2 मिली० आदि नामों से आती हैं। अल्सर के लिये ओमीप्राजोल (Omeprazole) एक नई आयी है जो अल्सर को भरने में बहुत जल्दी सहायता करती है। यह गैस्ट्रिक एसिड के स्राव को रोकती है। इसका एक कैप्सूल 20 मिग्रा० का दिन में एक बार, या 1 कै० 10 मिग्रा० सुबह-शाम दिया जाता है। यह औषधि कैप्सूल लोमेक (Lomac), कैप्सूल ओसिड (Ocid), कैप्सूल लोकिट] (Lokit) आदि नामों से मिलती है।

नोट-रोगी को चिन्ता न करने की सलाह दें।

शल्य चिकित्सा-गैस्ट्रिक अल्सर/Gastric ulcer treatment hindiजो 3-4 महीने इलाज के बाद भी ठीक न हो। लगातार दवाइयाँ देने के बाद भी अल्सर न भर रहा हो और रोगी को बार-बार दर्द रहता हो, गैस्ट्रिक आउटलेट रुक जाता है-ऐसी स्थिति में गैस्ट्रिक अल्सर/Gastric ulcer treatment hindi के लिये Partial Gastrectomy की. जाती है। इसमें अल्सर वाले भाग व उसके आस-पास वाला माँस निकाल दिया जाता है। ड्यूडेनल अल्सर में एसिड को कम करने के लिये ऑपरेशन के द्वारा वेगोटोमी (Vagotomy) की जाती है। इससे गैस्ट्रिक एसिड का स्राव कम हो जाता है।