liver pain

Liver Pain, जिगर में दर्द

Liver Pain का परिचय

इस प्रकार के यकृत विकार/ Liver pain treatment hindi में रोगी पित्ताशय शोथ का पहले से पीड़ित होता है, उसे उग्रस्वरूप का शूल एकाएक कौड़ी अथवा दक्षिण अधः पशुक प्रदेश में प्रतीत होता है, वमन एवं रोगी को ठंडा पसीना आता है। यह पीड़ा दक्षिण अंसफलक अथवा दाहिने कंधे की ओर जाती हुई प्रतीत होती है। कुछ समय पश्चात् पीड़ा एकाएक समाप्त हो जाती है।

इस रोग में पित्त की पथरी जब तक पित्ताशय में रुकी रहती है तब तक तो रोगी को किसी तरह की तकलीफ नहीं होती। कभी-कभी पेट में दर्द मालूम होता है किन्तु जब यह पथरी पित्ताशय से निकलकर पित्तवाहिनी नली में आ पहुँचती है तब धीरे-धीरे या जोर से पेट में एक तरह का असाह्य दर्द पैदा होकर रोगी को एकदम व्याकुल कर देता है। इस प्रकार के भयानक दर्द को पित्तशूल अर्थात् यकृत का दर्द/ Liver pain treatment hindi कहते हैं। यह 100 में से 10 रोगियों को 40 से 50 वर्ष की आयु के बाद अधिकतर स्त्रियों को होता है।

Billiary colic is paroxysmal pain is right hypochondrium due to smooth muscle spasm of bile duct pain radiates frequently to intrascapular area, right scapula or shoulder.

Liver Pain के प्रमुख कारण

यह रोग किसी कारणवश पित्त निकलने में बाधा पड़ने पर उत्पन्न होता है।

1. जो शारीरिक परिश्रम न कर अत्यधिक मानसिक परिश्रम करते हैं अथवा बैठे-बैठे दिन व्यतीत करते हैं, प्रोटीन्स और चर्बीमय खाद्य अधिक मात्रा में सेवन करते हैं उन लोगों में इस रोग से पीड़ित होने की सम्भावना अधिक रहती है (अधिकतर मोटी स्त्रियों को 40 से 50 वर्ष बाद)।

2. ‘वी’ कोलाई इस रोग का विशेष कारण

3. कुछ रोगों के जीवाणु (Bacteria) जैसे टाइफायड के जीवाणु पित्ताशय (गाल ब्लेडर) में सूजन पैदा करते हैं जिससे पथरी (Gall Stone) बनकर पित्तशूल उत्पन्न होता है।

Liver Pain के प्रमुख लक्षण

1. रोगी को धीरे-धीरे या जोर से पेट में एक तरह का असह्य दर्द पैदा होकर रोगी को एकदम व्याकुल कर देता है।

2. दर्द दाहिनी कोख से शुरू होकर चारों ओर (विशेषकर दाहिने कंधे और पीठ तक) फैल जाता है।

3. दर्द के साथ अक्सर कै, ठंडा पसीना, नाड़ी कमजोर, कोलेप्स (Collapse) श्वांस कष्ट, कामला, मूर्छा आदि लक्षण दिखायी देते हैं।

4. दर्द कई घण्टों से लेकर कई सप्ताह तक ठहर सकता है।

5., जब पथरी ऑत के अन्दर आ जाती है ‘ तब सब तकलीफें दूर हो जाती हैं और रोगी सो जाता है।

6. संक्रमण होने पर रोगी को ठंड या कँपकँपी के साथ बुखार आ जाता है।

नोट- * जाँच में T.L.C. बढ़ जाते हैं। * एक्स-रे करने पर पथरी का पता चल सकता है (कुछ केसिस में)।

* अल्ट्रासोनोग्राफी से स्टोन की सही जानकारी और स्थान आदि का पता चलता है। सीरम बिलीरूबिन की मात्रा ज्यादा मिलती है।

* मूत्र परीक्षा में ‘यूरोबिलीनोजन’ एवं ‘बिलीरुविन’ का पाया जाना ‘पीलिया‘ की तरफ इशारा करता है।

चिकित्सा विधि

1. रोगी को यथासम्भव पूर्ण विश्राम (Complete rest) दें।

2. दर्द के लिये दर्द निवारक दें। आवश्यकता पड़ने पर पुनः दें।

3. संक्रमण की स्थिति में रासायनिक औषधियाँ दें।

4. वमन के लिये वमन निरोधक औषधि दें।

5. शूल शमन के उपरान्त शल्य-चिकित्सा द्वारा पित्तवाहिनी की पथरी को निकाल देना ही एकमात्र उपाय है।

पथ्य तथा सहायक चिकित्सा

खुली हवा में घूमना तथा नियमित व्यायाम करना उपयोगी है। घोड़े की सवारी करना उपयुक्त रहता है। खूब खौलते पानी में फलालैन को डुबो कर निचोड़कर पेट पर रखकर सूखे कपड़े से बाँध दें। रोगी को अधिक से अधिक गर्म पानी या क्षारीय जल पीने को कहें। सहायक उपचार-3-4 चम्मच ऑलिव ऑयल (जैतून का तेल) गरम पानी या गरम दूध के साथ देने से पथरी मल के साथ निकल जाती है।

जिगर के दर्द में सेवन कराने योग्य आयु० पेटेन्ट टेबलेट्स

1. केल्कुरी (Calcury) चरक फार्मास्युटिकल्स’

2-2 गोली दिन में 3 बार जल से सेवन करावें।

2. स्टोनैक्स (Stonex) भारतीय

1-2 टिकिया दिन में 3-4 बार दें। बालक 1/2 टिकिया दिन में 3-4 बार ।

3. अश्मरी कोटेडटिक्की ‘धन्वन्तरि’

2-2 टिकिया दिन में 3 बार जल से दें।

नोट- पथरी की यह अचूक औषधि है।

4. नीरी टेबलेट (Neeri Tab.) ऐमिल’

2-3 टिकिया दिन में 3 बार जल से 2-3 माह तक नियमित रूप से सेवन कराते रहें।

अनुभूत चिकित्सा

कोकीलक्षा क्षार (Kokilaksha Kshar) 3 ग्राम, श्वेत पर्पटी 1/2 ग्राम ऐसी एक-एक मात्रा दिन में 2 या 3 बार कुल्की के decoction के साथ दें। Tamar Bhasam (R.T.S.) 60-120 mg की मात्रा में Bitter gaurd के जूस के साथ दिन में 2 बार दें।

नोट-जॉण्डिस‘ (कामला) में प्रयुक्त कैप्सूल लिक्टेरस’ (Licterus-इंडियन हर्बल लेबोरेटरी) : एवं जे० एण्ड जे० कम्पनी की ‘काइनोटोमीन’ (Kynotomine) एवं ‘हारबीटार (Harbitar) तथा हिमालया कम्पनी की लिव-52 (Liv-52) टिकिया एवं सीरप, ‘चरक’ फार्मास्युटिकल्स की ‘लिवोमिन’ टेबलेट तथा सीरप, ‘झण्डू’ कम्पनी की लिवोट्रिट (Livotrit) टिकिया तथा सीरप लिवर के दर्द/ Liver pain treatment hindi में समान रूप से उपयोगी है।

आधुनिक उपचार

रोगी को दर्द के लिये कोई दर्दनाशक इन्जेक्शन (जैसे–’वेराल्गान’, बुस्कोपान (Buscopan) 2 ml की मात्रा में I.M. लगायें। बहुत तेज दर्द की स्थिति में इन्जेक्शन ‘फोर्ट विन’ (Fortwin) 1 मिली और इन्जेक्शन फिनारगन (Phenargan) 2 मिली० मिलाकर शिरामार्ग से या मॉसपेशीगत दिया जा सकता है। इससे रोगी को तुरन्त दर्द व उल्टी से आराम मिलता है। शिरामार्ग से (I.V. Injection) धीरे-धीरे लगायें। इसके साथ में इन्जेक्शन एट्रोपीन भी लगायें।

यदि रोगी को ज्यादा उल्टियाँ हो रही हों तो I.V.ड्रिप लगा देनी चाहिये जिससे शरीर में पानी की कमी न हो। इन्जेक्शन मेटोक्लोप्रामाइंड हाइड्रोक्लोराइड (पेरिनॉर्म) 2 मिली०आई० वी० दें। इसके साथ में ‘ब्राडस्पेक्ट्रम एण्टीबायोटिक’ दें जैसे ‘एम्पीसिलीन’, सिफेलेक्सिन’ या ‘जेण्टामाइसिन’ दर्द वाली जगह को गर्म पानी की बोतल से सिंकाई करवायें। खाने में चिकनाई न लेने को कहें। जब दर्द कम हो जाये तो रोगी को सारी दवायें मुख द्वारा दी जा सकती हैं।

दर्द ज्यादा होने पर या बार-बार होने पर पित्ताशय को ऑपरेशन के द्वारा निकाल देना चाहिये। आजकल आधुनिक लैप्रोस्कोपिक तरीके से पित्ताशय को निकाल दिया जाता है। इसमें रोगी को अधिक समय तक अस्पताल में रहने की आवश्यकता नहीं पड़ती है।