STOMATITIS

STOMATITIS treatment hindi का परिचय

इसमें रोगी के मुख के अंदर जीभ और गालों की दीवारों पर व्रण या छाले हो जाते हैं। छालों/Stomatitis treatment hindi में तीव्र वेदना होती है। खाने पीने में काफी तकलीफ होने लगती है। तेज मिर्च-मसालेदार पदार्थ खाते ही रोगी वेदना से बिलबिला जाता है। रोगी ठीक से बोल पाने में भी असमर्थ हो जाता है। इस रोग से ग्रसित रोगी को बेहद कष्ट होता है। यह एक आम रोग है। इसे मुखपाक भी कहते हैं।

STOMATITIS treatment hindi के प्रमुख कारण

1. कफवर्धक पदार्थों का अत्यधिक सेवन करने से।

2. यदि मुँह की अच्छी तरह सफाई न की जाये तो भी समय बीतने पर मुँह में छाले पड़ जाने की पूरी संभावना होती है।

3. जो लोग पान, तम्बाकू आदि मुख शुद्धिके द्रव्यों का अधिक मात्रा में सेवन करते हैं, उनके मुँह में भी छाले पड़ जाते हैं ।

4. आधुनिक विज्ञान के अनुसार यदि आहार में विटामिन ‘सी’ एवं विटामिन ‘बी’ के तत्वों जैसे रीबोफ्लेवीन, निकोटिनिक एसिड, फोलिक एसिड साइनोकोवालामीन आदि की कमी हो जाती है, तो मुँह में छाले पड़ जाते हैं अर्थात् मुखपाक हो जाता है।

5. संग्रहणी जैसे रोग में भोजन के इन तत्वों का अभिशोषण करने की क्षमता की कमी हो जाने से भी मुँह में छाले पड़ जाते हैं।

6. जो छोटे बच्चे चॉकलेट, च्युइंगम, बर्फ के गोले आदि अधिक मात्रा में खाते हैं. उनके मुँह में कभी-कभी एलर्जी होने से भी छाले पड़ जाते हैं।

STOMATITIS treatment hindi के प्रमुख लक्षण

1. यदि मुँह में किसी प्रकार का स्वाद महसूस न होता हो, मुँह फीका बना रहता हो, मुँह बार-बार सूखता हो या उसमें कड़वाहट बनी रहती हो, तो समझ लेना चाहिये कि पेट की पाचन क्रिया बिगड़ चुकी है।

2. यदि पेट में गर्मी बढ़ जाये, अपच हो जाये अथवा उसमें पित्त एकत्र हो जाये, तो मुख पाक हो जाता है यानी मुँह में छाले पड़ जाते हैं। ताल. गलफड़ों. जीभ, होठों के अंदर यानी पूरे मुँह में जहाँ-जहाँ भी म्यूकस मेम्ब्रेन होती है, ये छाले हो जाते हैं। मुँह लिसलिसा हो जाता है और उसमें जलन होने लगती है। मुँह में लालिमा लिये हुए छाले साफ दिखायी देते हैं। भोजन करते समय यदि आहार इन छालों/Stomatitis treatment hindi से रगड़ खा जाते हैं, तो जलन होने लगती है। गर्म आहार भी मुख में नहीं रखा जा सकता। दिनभर बेचैनी बनी रहती है और किसी काम में मन नहीं लगता है। वेदना के कारण रोगी ठीक से बोल नहीं पाता है। बोलने पर छालों/Stomatitis treatment hindi में पीड़ा होती है। रोगी के मसूड़ों में सूजन हो जाती है। छाले हो जाने पर रोगी के मुख से तीव्र दुर्गन्ध आने लगती है। रोगी की साँस में भी, दुर्गन्ध आती है। जीभ तथा गालों का अंदरूनी हिस्सा लाल सुर्ख हो जाता है। कुछ रोगियों के तालू में भी सूजन आ जाती है। रोगी को कब्ज रहती है अथवा दस्त लगे रहते हैं। मल भी कठोर रहता है। रोगी बार-बार थूकता रहता है।

चिकित्सा विधि, पथ्यापथ्य एवं सहायक उपचार

चिकित्सा विधि

रोगी जब मुखपाक या मुख के छालों/Stomatitis treatment hindi की शिकायत लेकर आता है तब उससे पूछताछ करने पर अक्सर रोगी पाचन विकार का शिकार मिलता है। कब्ज भी हो सकती है।

1. सर्वप्रथम यदि कब्ज हो तो रोगी को एनीमा दें। ग्लिसरीन सपोजीटरी भी प्रयोग की जा सकती है। कब्ज के लिये रात को सोने से पूर्व रोगी को 4-6 चम्मच ईशबगोल दूध में घोलकर निगलने की सलाह दें।

2. रोगी को मुख साफ करने का निर्देश दें।

3. संक्रमण से बचाव की चिकित्सा के लिये संक्रमणनाशक लोशन से कुल्ले करने का निर्देश दें।

4. रोगी को पर्याप्त विटामिन्स तथा मिनरल्स का प्रयोग कराना चाहिये।

सामान्य पथ्यापथ्य एवं सहायक उपचार

1. आहार में दूध का उपयोग अधिक करें। दूध में चावल और शक्कर डाल कर पकाई हई खीर रोगी के लिये आहार और औषधि दोनों का काम करती है। इसके लिये गाय या बकरी का दूध उत्तम होता है। डेरी का दूध, आइस्क्रीम का भी सेवन किया जा सकता है। आइस्क्रीम मुँह में शीतलता प्रदान करती है। यदि छोटे बच्चों का मुँह आ गया हो तो सीधे बकरी के थन से दूध की धार बच्चे के मुँह पर छोड़ने से आराम मिलता है। प्यास लगने पर ताजा और फीकी छाछ पीनी चाहिये। इसमें जीरा, धनियाँ-जीरा और नमक भी डाला जासकता है। छाछ से शान्ति मिलती है। छाछ से सम्पूर्ण पाचनतंत्र में भी सुधार होता है। दिन में सुबह शाम 2 बार मामूली सा नमक और जीरा मिलाकर नीबू का शर्बत पियें। नीबू पेट की गड़बड़ी और मुँह के छालों/Stomatitis treatment hindi को मिटाने में बहुत सहायता करता है। अनार का रस लिया जा सकता है। इससे मुँह के छाले के घावों को भरने में सहायता मिलती है।

मुँह के छालों STOMATITIS treatment hindi में सेवन कराने योग्य आयु० पेटेन्ट टेबलेट्स

1. टेबलेट मेनोल (Menol) ‘चरक’

बच्चों को 1-1 टिकिया दिन में 2-3 बार दें। वयस्कों को 2-2 टिकिया दिन में 3 बार दें।

2. हर्बोलेक्स (Herbolex) ‘हिमालय’

वयस्कों को 1-3 टिकिया रात को सोते समय अथवा आवश्यकतानुसार सेवन करायें। कब्ज के कारण यदि मुखपाक हो तो इससे आराम मिल जाता है।

3. रेगुलेक्स (Regulex) ‘चरक’

रोग का कारण यदि कब्ज हो तो 1-2 टिकिया रात को सोते समय प्रयोग कराने से पर्याप्त लाभ होता है।

4. हेमोप्लेक्स (Hemoplex) ‘डिशेन’

1-2 टिकिया दिन में 3 बार अथवा आवश्यकतानुसार दें। बच्चों को 1/4-1/2 टिकिया दिन में 3 बार दें। साथ में कब्ज की दवा दें।

5. सेप्टीलिन (Septelin) हिमालय

1-2 टिकिया दिन में 3-4 बार दें। बच्चों को आयु के अनुसार दें।

6. स्टोमेट (Stomet) ‘मोहता’

1-2 टिकिया दिन में 3-4 बार अथवा आवश्यकतानुसार दें।

7. स्टोमाटेव (Stomatab) ‘सागर’

1-2 टिकिया दिन में 3 बार अथवा आवश्यकतानुसार दें।

8. एक्रीमिन (Acremin) आर्या’

वयस्कों को 1-1 टिकिया दिन में 3 बार दें। बच्चों को आयु के अनुसार । साथ में कब्ज का उपचार करें।

9. कोफोल (Kofol) ‘चरक’

1-2 टिकिया हर 1/2-1 घण्टे के अन्तराल पर चूसने को दें।

10. लेक्सिव (Laxive) ‘गुफिक’

1-2 चम्मच रात सोते समय दें।

11. लेक्सोडेप (Laxodap) डेप’

वयस्क 5-10 ग्राम दिन में 2 बार।

12. पुरीला लिक्विड (Purilla liquid) ‘चरक’

2-3 बड़े चम्मच दिन में 2-3 बार दें।

13. मेनोल जेली (Menolljelly) ‘चरक’

वयस्कों को 1 बड़ा चम्मच सुबह-शाम दिन में। 2 बार दूध के साथ तथा बच्चों को 1/2 चम्मच दिन में 2 बार दूध के साथ दें।

मुँह के छालों STOMATITIS treatment hindi में सेवन कराने योग्य आयु० पेटेन्ट टेबलेट्स

1. टेबलेट मेनोल (Menol) ‘चरक’

बच्चों को 1-1 टिकिया दिन में 2-3 बार दें। वयस्कों को 2-2 टिकिया दिन में 3 बार दें।

2. हर्बोलेक्स (Herbolex) ‘हिमालय’

वयस्कों को 1-3 टिकिया रात को सोते समय अथवा आवश्यकतानुसार सेवन करायें। कब्ज के कारण यदि मुखपाक हो तो इससे आराम मिल जाता है।

3. रेगुलेक्स (Regulex) ‘चरक’

रोग का कारण यदि कब्ज हो तो 1-2 टिकिया रात को सोते समय प्रयोग कराने से पर्याप्त लाभ होता है।

4. हेमोप्लेक्स (Hemoplex) ‘डिशेन’

1-2 टिकिया दिन में 3 बार अथवा आवश्यकतानुसार दें। बच्चों को 1/4-1/2 टिकिया दिन में 3 बार दें। साथ में कब्ज की दवा दें।

5. सेप्टीलिन (Septelin) हिमालय

1-2 टिकिया दिन में 3-4 बार दें। बच्चों को आयु के अनुसार दें।

6. स्टोमेट (Stomet) ‘मोहता’

1-2 टिकिया दिन में 3-4 बार अथवा आवश्यकतानुसार दें।

7. स्टोमाटेव (Stomatab) ‘सागर’

1-2 टिकिया दिन में 3 बार अथवा आवश्यकतानुसार दें।

8. एक्रीमिन (Acremin) आर्या’

वयस्कों को 1-1 टिकिया दिन में 3 बार दें। बच्चों को आयु के अनुसार । साथ में कब्ज का उपचार करें।

9. कोफोल (Kofol) ‘चरक’

1-2 टिकिया हर 1/2-1 घण्टे के अन्तराल पर चूसने को दें।

10. लेक्सिव (Laxive) ‘गुफिक’

1-2 चम्मच रात सोते समय दें।

11. लेक्सोडेप (Laxodap) डेप’

वयस्क 5-10 ग्राम दिन में 2 बार।

12. पुरीला लिक्विड (Purilla liquid) ‘चरक’

2-3 बड़े चम्मच दिन में 2-3 बार दें।

13. मेनोल जेली (Menolljelly) ‘चरक’

वयस्कों को 1 बड़ा चम्मच सुबह-शाम दिन में। 2 बार दूध के साथ तथा बच्चों को 1/2 चम्मच दिन में 2 बार दूध के साथ दें।

* छालों/Stomatitis treatment hindi पर ग्लिसरीन या वोरो-ग्लिसरीन लगाने से लाभ होता है।

*शहद मुख में लगाने से लाभ होता है।

* पानी में शहद मिलाकर कुल्ले करने से आशातीत लाभ मिलता है।

*नीम के पानी में शहद मिलाकर गरारे करने से लाभ होता है। शहद और दही मिलाकर चटाने से भी फायदा होता है। कच्चे दूध में शहद मिलाकर गरारे करने से भी जल्दी लाभ होता है।

*विटामिन ‘बी’-कॉम्पलेक्स तथा विटामिन ‘सी’ प्रयोग करना हितकर होता है।


अनुभूत चिकित्सा

“गुडमैन्स’ कम्पनी का ‘गुडमैन्स मुँह के छालों/Stomatitis treatment hindi की दवा’ मुँह के हर प्रकार के छालों/Stomatitis treatment hindi की उत्कृष्ट औषधि है। इस औषधि को दिन में 2 बार जीभ पर लगाकर लार टपकाना चाहिये। साथ ही चरक कम्पनी की मेनोल 2-2 टिकिया दिन में 2 बार दें। यदि रोगी को कब्ज की भी शिकायत रहती हो तो ‘हरबोलेक्स’ (हिमालय) की 3-3 टिकिया रात को सोते समय दें।

आधुनिक उपचार

अल्सरेटिव टाइप रोग में (अल्सर जीभ के किनारों के साथ मसूड़ों पर, ओठों पर, तालू व गाल की अन्दरूनी सतह पर) टेबलेट मैट्रोनिडाजोल 200 मिग्रा० दिन में 3 बार 5 से 7 दिनों तक दें अथवा पेनिसिलीन V (Pented) 400, 6 से 8 घण्टे में 5 दिनों तक सेवन करायें। मसूड़ों में नेक्रोसिस की स्थिति में दंत चिकित्सक से परामर्श लें।

* केनडिडायसिस (पस) टाइप के (इसमें सफेद बड़े-बड़े धब्बे जीभ और मुँह की श्लेष्मा झिल्ली पर, इनमें दर्द, कभी खून भी) रोग में जेन्शन वायलेट से मुँह को 3-4 बार पेन्ट करें अथवा निस्टेटिन (5,00,000 यूनिट) टेबलेट को मुँह में रखकर पर्याप्त समय तक चूसें। इसको दिन में 3-4 बार 4 से 5 दिनों तक दें।

*एप्थस अल्सरेशन टाइप (मुँह में सतही दर्द भरे अल्सर जो बार-बार होते हैं) के रोग में हाइड्रोकार्टिजोन हेमीसक्सीनेट लोजेन्जेज (2.5 मिग्रा.) को हर 6 घण्टे में दें (रोग की शुरूआत में)। टेट्रासाइक्लीन 250 मिग्रा० को 10 एम० एल० पानी में घोल कर अल्सर पर 3 मिनट तक डालें। इसको दिन में 4 बार लगायें। साथ में रोगी को अच्छे ब्रश से दाँत साफ करने की हिदायत दें। दर्द के लिये दर्द निवारक औषधि या स्प्रे दें।

* कुपोषण टाइप (इसमें जीभ लाल, खुरदरी व दर्ददायक होती है, रोग विटामिन विशेषकर ‘बी’ कॉम्पलेक्स की कमी से) रोग में जेन्शन वायलेट और ग्लिसरीन मिलाकर मुँह में लगायें। अथवा बोरोग्लिसरीन लगायें। मुँह से विटामिन बी कॉम्पलेक्स, विटामिन सी, आयरन के कैप्सूल या सीरप दें। रोग ज्यादा तीव्र होने पर विटामिन बी कॉम्पलेक्स या मल्टीविटामिन्स के इन्जेक्शन लगायें।

* एलर्जी टाइप (रोगी के मुँह में दर्द, भोजन करने से दर्द में वृद्धि, मुँह से पानी, संक्रमण होने पर मुँह में बदबू, मसूड़ों से रक्त एवं उनमें सूजन) के रोग में एविल 25 मिग्रा० और डेक्सामेथासोन या प्रेडनीसोलोन की गोली दिन में 2 से 3 बार दें। साथ में एक मल्टी विटामिन की गोली दें।